कोरोना वायरस, अब धीरे-धीरे केंद्रीय सुरक्षा बलों (सीएपीएफ) के कर्मियों को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। इसके चलते केंद्रीय गृह मंत्रालय और सभी बल मुख्यालय चिंतित हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों से कहा गया है कि वे 'कोरोना' को एक खतरनाक शत्रु मानकर उससे लड़ें।
खासतौर पर दिल्ली में तैनात सीएपीएफ कर्मियों में कोरोना के पॉजिटिव केस तेजी से बढ़ रहे हैं। कोरोना संक्रमण ने केंद्रीय अर्धसैनिकों बलों के चार सौ से अधिक जवानों और अधिकारियों को अपनी चपेट में ले लिया है।
बीएसएफ के दो जवानों ने गुरुवार को कोविद-19 के चलते दम तोड़ दिया। इस बल में 190 से अधिक जवान कोरोना से पीड़ित हैं। सीआरपीएफ में पहले ही एक एसआई की कोरोना से मौत हो चुकी है। इस बल में कोरोना के पॉजिटिव मामले 162 से अधिक है।
सीआरपीएफ में आईजी डायरेक्टर (मेडिकल) डॉ. एचएल रसकरन ने सभी कर्मियों को कोरोना की ताकत और कमजोरी बताई है। अब इसी आधार पर कर्मियों को लड़ाई लड़नी है। चूंकि किसी भी दुश्मन को हराने के लिए एक मजबूत पक्ष यह होता है कि हम उसके नुकसान पहुंचाने वाले हमले से बच जाएं।
उससे बचाव का एक तरीका ढूंढ लिया जाए। उसका कमजोर पहलू यह होता है कि हम जानते हैं उस पर हमला कैसे करना है और नष्ट किस तरह करेंगे। कोरोना भी एक बॉल के आकार का होता है। इसके चारों ओर कुछ कांटे से हैं।
यह उच्चस्तर वाला संक्रामक वायरस है। इसी वजह से भारी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। बतौर डॉ. रसकरन, हम इससे बच सकते हैं। अगर हम सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, दस्ताने और सैनिटाइजर का सही इस्तेमाल करते हैं तो आसानी से कोरोना को अपनी ओर आने से रोका जा सकता है।
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