सीएसआईआर के महानिदेशक शेखर मांंडे
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ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने फेविपिराविर दवा के नैदानिक परीक्षण (क्लीनिकल ट्रायल) को अनुमति दे दी है। चीन, जापान आदि में इस दवा का इस्तेमाल इंफ्यूएंजा के लिए किया जाता है और माना जा रहा है कि यह कोविड-19 के इलाज में उपयोगी साबित हो सकती है। यह फाइटोफार्मास्युटिकल एक पौधे का एक अर्क है। इस बात की तजानकारी सीएसआईआर के महानिदेशक शेखर मांडे ने दी।
बता दें कि फेविपिराविर एक वायरल-रोधी दवा है। इंफ्लूएंजा वायरस के खिलाफ इस दवा ने सही प्रतिक्रिया दिखाई है। जापान में इंफ्लूएंजा वायरस के इलाज के लिए इसी दवा के उपयोग की अनुमति है। हालांकि 30 अप्रैल को दवा कंपनी ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने कहा था कि उसे कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों पर फेविपिराविर गोलियों का परीक्षण करने की अनुमति मिल गई है।
अमर उजाला से बातचीत में सीएसआईआर के महानिदेशक शेखर सी मांडे ने बताया कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने फेविपिराविर, और एसीक्यूएच नामक एंटी वायरल दवा के दूसरे चरण के देश में ट्रायल के लिए उन्हें मंजूरी दे दी है। यह एक ऐसी दवा है जो कि पहले से ही इंफ्लूएंजा के उपचार के लिए बड़े पैमाने पर भारत समेत अनेक देशों में प्रयोग की जाती है। इन दवाओं का कोरोना के संक्रमण पर एक सप्ताह के भीतर ट्रायल शुरू हो जाएगा, यह परीक्षण सीधे दूसरे चरण से होगा।
शेखर सी मांडे के मुताबिक क्योंकि यह एक सुरक्षित दवा है इसलिए इसका प्रयोग फेज -2 से किया जा रहा है। ताकि ट्रायल के बाद इसे कोरोना संक्रमण के लिए जल्द से जल्द इस्तेमाल में लाया जाए। इस ट्रायल में एक से डेढ़ माह का समय लगेगा। इन परीक्षणों में दवा की सफलता इसके आगे के मार्ग को तय करेगी। क्योंकि इसका परीक्षण सफल रहने पर यह सस्ती कीमत पर भारत में उपलब्ध हो सकेगी। क्योंकि यह एक पुरानी दवा है जबकि इसका पेटेंट अब खत्म हो चुका है। ऐसे में दुनिया द्वारा खोजी जा रही कोरोना की सभी दवाओं में यह सबसे कम कीमत पर भारत में उपलब्ध हो सकेगी।