जानकारी के अनुसार बिहार में संक्रमण का ग्रोथ रेट 10 फीसदी से भी ज्यादा देखने को मिल रहा है जोकि राष्ट्रीय स्तर पर तकरीबन 4.1 फीसदी है। यहां कोरोना वायरस की मृत्युदर भी राष्ट्रीय औसत 2.54 फीसदी से ज्यादा 3.2 फीसदी दर्ज की गई है। इसके अलावा बिहार में अब तक संक्रमण की जांच को लेकर भी दिक्कतें आ रही हैं। यहां टेस्ट पॉजीटिविटी रेट (टीपीआर) करीब 5 फीसदी से ज्यादा है।
कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग के आंकड़ें सार्वजनिक नहीं : विशेषज्ञ
जोधपुर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी के पूर्व प्रोफेसर रीजो एम जॉन का कहना है कि कंटेनमेंट जोन की रणनीति पर राज्यों के कार्य को कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग के जरिए आंका जा सकता है। लेकिन राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।
वहीं प्रोफेसर शमिका रवि ने भी सोमवार को सोशल मीडिया पर लिखा है कि उनके पास कर्नाटक और केरल का कुछ आंकड़ा है लेकिन कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग या संक्रमण के फैलाव का पता लगाने के लिए इतना काफी नहीं है।
वहीं केरल डेटा एक्सपर्ट जेम्स विल्सिन का कहना है कि कंटेनमेंट योजना पर अगर सही दिशा में काम होता तो देश में सक्रिय मरीजों के कम होने की रफ्तार और भी ज्यादा कम होती। सरकार हमेशा रिकवरी दर की वृद्धि पर बात करती है लेकिन संक्रमण की ग्रोथ पर नहीं।