दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल नोडल अफसर डा. अमित सूरी कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन की सक्रियता की तारीफ करते नहीं थकते। डॉक्टर हर्षवर्धन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सक्रियता की तारीफ करते नहीं थकते।
विदेश मंत्रालय के अधिकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर के कौशल और प्रबंधन को बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। दोनों मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के एक उप सचिव की मानें तो भारत ने इसी तालमेल से कोरोना का फोबिया देश में पैदा ही नहीं होने दिया। सूत्र बताते हैं कि जब कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर दुनिया के देश सो रहे थे, तब भारत जाग रहा था। हम संक्रमण के भारत आने के खतरों, बचाव और उपायों पर चर्चा करके इसे अमल में ला रहे थे। विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव का मानना है कि कोरोना का भारत में उतना बड़ा खतरा नहीं है, जितना अमेरिका में है।
क्या हैं कोरोना फोबिया रोकने में सफलता के बड़े कारण
विदेश और स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि इटली, ईरान, अमेरिका समेत दुनिया के 50 से अधिक देशों में कोरोना संक्रमण का फोबिया बड़े पैमाने पर है। अभी अब भी भारत में वह स्थिति नहीं है। भारत में कोरोना के पॉजिटिव मरीज भी ठीक करने में सफलता मिली है। बताते हैं इसका सबसे बड़ा कारण केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा, हर्षवर्धन का खुद चिकित्सक होना, चिकित्सा मामलों की जानकारी रखना और लगातार सक्रिय बने रहना है।
दूसरा बड़ा कारण प्रधानमंत्री द्वारा खुद पहल करके लगातार समीक्षा करना है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका वाले या अन्य देशों में फंसे भारतीयों को देश में लाने के लिए प्रोटोकॉल तैयार कराने, कूटनीतिक प्रयासों को गति देने में अहम रहे।
चीन से लिया सबक, किए उपाय, बचाव को बनाया मंत्र
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निदेशक से प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत ने चीन के वुहान प्रांत में कोरोना का संक्रमण बढ़ने के बाद से लगातार वहां की स्थितियों पर ध्यान दिया। हमारी पहली कोशिश यही थी कि कोरोना वायरस का कोई अनजाना संक्रमित देश में दाखिल न हो क्योंकि इससे अन्य में संक्रमण फैलेगा।
इसलिए नेपाल, म्यामांर की सीमाओं से लेकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, बंदरगाहों पर विशेष ध्यान दिया गया। थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई और कड़ाई से इसे लागू किया गया। समय रहते आइसोलेशन वार्ड में संक्रमितों को पहुंचाया गया और चिकित्सीय प्रक्रिया आरंभ हुई। एडवाइजरी, राज्यों के विशेष एडवाइजरी पर ध्यान दिया गया। सूत्र का कहना है कि फरवरी के पहले सप्ताह में ही नई दिल्ली ने कोरोना संक्रमण के भयानक रूप लेने का अंदाजा लगा लिया था।
कई देश देख रहे हैं भारत की ओर
ईरान ने भारत से मदद मांगी है। भारत ने कोरोना संक्रमण को काबू में करने के लिए चीन की यथा संभव सहायता की है। पीएम मोदी ने दक्षेस के सदस्य देशों के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग करके उपायों, प्रयासों का साझा किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना है कि कई देश कोरोना संक्रमण और इसके फोबिया से निपटने के भारत के प्रयासों की सराहना कर रहे हैं। वह हमसे सहायता चाहते हैं।
कहां तक है हमारी तैयारी
केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार एवं कल्याण मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि आप एक ऐसे संक्रमण के बारे में बात कर रहे हैं, जिसका इलाज अभी चिकित्सा विज्ञानियों के पास नहीं है। कारण, निवारण सभी पर अनुसंधान चल रहा है। मगर फिर भी भारत ने संक्रमण से निपटने के युद्ध स्तर पर किए जाने वाले प्रयास की योजना बनाई है।
सूत्र का कहना है कि मानकर चलिए, दुनिया के अन्य देशों की तुलना में यहां इसका संक्रमण बहुत कम घातक रहेगा। यह पूछने पर कितने दिनों तक कोरोना संक्रमण का खतरा रहेगा? सूत्र का कहना है कि 15-20 अप्रैल के आस-पास बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं विदेश मंत्रालय के सूत्र का कहना है कि कोरोना संक्रमण का स्वास्थ्य के लिहाज से जितना बड़ा खतरा लग रहा है, उससे कहीं ज्यादा आर्थिक क्षेत्र में परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए यह समय धैर्य से काम लेने और अनुशासित नागरिक की तरह चलने का है।