कंटीन्यूअस पॉजीटिव एयरवे प्रेशर'
- फोटो : Amar Ujala
वेंटिलेटर का एक विकल्प हो सकता था सीपीएपी
'कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर' मशीन भी एक वेंटिलेटर की तरह काम करती है, लेकिन इसमें ट्यूब की जगह पर फेस मास्क, नेजल मास्क या हुड्स के जरिए मरीज को ऑक्सीजन दी जाती है। अमेरिका में कोरोना संक्रमण फैलने के शुरुआती दौर में 24 फरवरी को वॉशिंगटन के एक नर्सिंग होम 'लाइफ केयर सेंटर ऑफ किर्कलैंड' में जब कोरोना के केस आने लगे तो वहां सबसे पहले सीपीएपी ही इस्तेमाल में लाई गई।
वहां के मेडिकल एडमिनिस्ट्रेटर जिम विट्हने ने कहा कि यह मशीन सांस संबंधी बीमारियों से ग्रसित लोगों के लिए सबसे अच्छा अभ्यास है, लेकिन जल्द ही किंग काउंटी हेल्थ ऑफिशियल ने इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश दे दिए।
वैज्ञानिकों की मानें तो इस मशीन का इस्तेमाल वेंटिलेटर के विकल्प के तौर पर नहीं किया जा सकता है। वजह, मास्क लगाने वाला व्यक्ति जब सांस छोड़ता है, तो उसके साथ बहुत सूक्ष्म कणों के रूप में वायरस हवा में आ जाता है।
एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सिजनेशन
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एक विकल्प हो सकता है 'बाईलेवल पॉजीटिव एयरवे प्रेशर'
डेनवर के ज्यूविश नेशनल हेल्थ के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केस विशेषज्ञ डॉक्टर जेम्स फिनिजेन ने 'बाईलेवल पॉजीटिव एयरवे प्रेशर' को सीपीएपी तकनीक से बेहतर विकल्प बताया है। इसमें किसी मरीज के सांस छोड़ने की प्रक्रिया को एक निर्धारित प्रेशर पर सेट किया जा सकता है।
इस वजह से मरीज की छोड़ी गई सांस में वायरस बाहर आने की संभावना बहुत कम रहती है। हालांकि इस तकनीक में भी मास्क का इस्तेमाल होता है, मगर कड़ी सावधानी बरती जाए तो सामान्य केसों में, जहां मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है, वहां इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
ईसीएमओ (एक्स्ट्रा-कॉरपोरियल मेंम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) डिवाइस एक लाइफ सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करती है। यह डिवाइस शरीर को उस वक्त ऑक्सीजन सप्लाई करने में मदद देती है, जब किसी मरीज के फेफड़े या दिल ठीक तरह से काम नहीं कर पाते।
इसकी खासियत यह है कि इसमें कोरोना वायरस की लीकेज का कोई डर नहीं रहता, मगर इसका उपकरण सेट करना व ऑपरेट करना काफी मुश्किल होता है। कारण, यह पहले रोगी के रक्त को खींचता है, फिर कार्बन डाइऑक्साईट को खत्म कर उसमें ऑक्सीजन जोड़ने के लिए एक उपकरण के माध्यम से द्रव को पास करता है।
अंत में रोगी के शरीर में वही रक्त वापस लौटा देता है। यही वजह है कि इसे चलाने के लिए विशेष एक्सपर्ट की जरूरत पड़ती है। इनकी संख्या दूसरे डॉक्टरों के मुकाबले बहुत कम होती है।
बाईलेवल पॉजीटिव एयरवे प्रेशर'
- फोटो : Amar Ujala
कोरोना से लड़ाई में अपर्याप्त मात्रा में हैं वेंटिलेटर
यूएसए में कोरोना के 1,64,359 केस सामने आ चुके हैं। नेशलन सेंटर फॉर बायोटेक्टिनकल इंर्फोमेशन के अनुसार, लगभग 62 हजार वेंटिलेटर हैं। यूके में कोरोना से ग्रसित मरीजों की संख्या 22,141 हैं, जबकि वेंटिलेटर करीब आठ हजार हैं।
वहीं, दूसरी ओर, आतंकवाद से प्रभावित पश्चिम अफ्रीका में स्थित छोटे से देश माली, जिसकी जनसंख्या 19 लाख है और कोरोना फैलता जा रहा है, वहां पर वेंटिलेटर की संख्या केवल 56 है।
भारत में 40 हजार वेंटिलेटर हैं, इतने ही और के ऑडर भी दिए गए
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इस समय देश में करीब 40 हजार वेंटिलेटर हैं और नोएडा की एक घरेलू कंपनी एग्वा हेल्थकेयर को दस हजार वेंटिलेटर बनाने का ऑर्डर दिया गया है।
इनकी सप्लाई अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक शुरू होने की उम्मीद है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को भी 30,000 वेंटिलेटर तैयार करने का ऑर्डर दिया गया है। इसके अतिरिक्त भारतीय ऑटो निर्माता कंपनियां भी वेंटिलेटर बनाने की तैयारी कर रही हैं।