यूपी और बिहार के दस जिलों में 1000 किमी के रास्ते पर ग्रामीणों का हाल, बाहर से आए लोग धड़ल्ले से इधर उधर घूम रहे... दिल्ली-मुंबई से वापस आए लोगों के सीधे गांव पहुंचने और पहचान छिपाने से बढ़ रही दहशत... पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट।
कोरोना के खौफ से घरों में कैद पूर्वांचल और बिहार के गांव के लोगों में अब दहशत और बढ़ गई है। इस दहशत की मुख्य वजह है लॉकडाउन के कारण बड़े शहरों में काम धंधा बंद होने के बाद गांव पहुंचे हजारों प्रवासी मजदूर।
दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे महानगरों से लाखों मजदूरों की पूर्वांचल और बिहार में वापसी के बाद यहां के गांवों का हाल जानने के लिए ‘अमर उजाला’ ने यूपी की राजधानी लखनऊ से बिहार के सीमावर्ती गोपालगंज के बीच दस जिलों (बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, बस्ती, गोंडा, संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, गोपालगंज (बिहार) में पहुंच कर ग्रामीणों में बढ़ रहे खौफ को करीब से देखा।
करीब 1000 किमी की इस यात्रा में नेशनल हाईवे-28 के आसपास दस जिलों में एक चीज जो साफ दिखी वो शहरों से लौटे मजदूरों की गाँवों में चोरी-छिपे घुसने, क्वारंटीन में टिक कर न रहने से लोगों में दहशत कई गुना बढ़ गई है। हाईवे पर अयोध्या से 20 किमी पहले बाईं तरफ एक पगडंडी मुड़ती है। किनारे के खेतों में पकने को तैयार गेहूं के खेत किसानों का जैसे इंतजार भर कर रहे हैं। इसी पगडंडी पर आगे पड़ने वाले गाँव धौरहरा में कुछ मजदूर दिल्ली से वापस आए हैं।
चिंता का माहौल
मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों से बिहार लौट रहे मजदूरों को लेकर गांवों में चिंता का माहौल है, इन मजदूरों को जांच के बाद क्वारंटीन सेंटरों में रखा जा रहा है, लेकिन कई लोगों के इन केंद्रों से भाग जाने के कारण हालात बिगड़ने का अंदेशा भी है।