कोरोना वायरस के खतरे से निबटने के लिए देश के स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण विभाग और मंत्रालय भी दिन-रात प्रयास कर रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर स्थिति ज्यादा बिगड़ती है, तो इस खतरे से निबटने के लिए सेना की मदद भी ली जा सकती है।
इस चर्चा के बीच बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की और कोरोना से लड़ाई की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ चल रही तैयारी की गति को दोगुना कर दिया जाए और इसके लिए सभी विभाग आपस में तालमेल बिठाकर काम करें।
उन्होंने सरकार के अन्य विभागों के साथ भी तालमेल बिठाकर काम करने का आग्रह किया। इस बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल करमबीर सिंह, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल एमएम नरवने और चीफ ऑफ एयर स्टाफ चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया भी शामिल थे।
राजनाथ सिंह ने कहा कि कोरोना का खतरा बड़ा अवश्य है लेकिन हम इस लड़ाई को जीतेंगे। इसके लिए सभी को मिलजुलकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण समय में अपने प्रयास दोगुना करने और सैनिटाइजर, फेस मास्क और अन्य जरूरी सामानों को पर्याप्त मात्र में तैयार रखने को कहा।
जनरल बिपिन रावत ने रक्षा मंत्री को बताया कि कोरोना वायरस से निबटने के लिए जरूरत पड़ने पर अलग अस्पताल का उपयोग किया जा सकता है और ऐसे अस्पतालों की पहचान कर ली गई है, जिन्हें केवल कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए उपयोग किया जा सकेगा।
अभी तक नौ हजार बिस्तरों की व्यवस्था कर ली गई है। इस समय लगभग एक हजार लोगों को विभिन्न जगहों पर क्वारंटीन करके रखा गया है।
वहीं, नौसेना ने भी स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति से निबटने के लिए उनकी नौकाएं बिलकुल तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर किसी भी समय इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। नौसेना स्थानीय प्रशासन को भी आवश्यक मदद देने के लिए तैयार है।
चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल एमएम नरावने ने राजनाथ सिंह को बताया कि सेना के 8,500 डॉक्टर और अन्य सहयोगी स्टाफ कोरोना संक्रमण के खतरे में लोगों की सेवा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। पड़ोसी देशों को भी कोरोना से निबटने के मामले पर उन्होंने कहा कि नेपाल को जल्दी ही इस संदर्भ में मदद की जाने वाली है।