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चीन से लौटे लोग आइसोलेशन सेंटर में आईटीबीपी कर्मियों से जान रहे भारत-चीन सरहद की बारीकियां

Mon, 03 Feb 2020 05:23 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • लौटने वालों में सात मालदीव के नागरिक समेत दो डिप्लोमेट भी शामिल
  • बोले- कोरोना वायरस से जीतनी है जंग
  • आईटीबीपी के 30 डॉक्टरों और सहयोगियों की टीम
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Arrival From China - फोटो : Social Media
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विस्तार
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कोरोना वायरस फैलने के बाद चीन से दिल्ली लौटे 406 लोगों का जज्बा भी गजब का है। इन लोगों को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के छावला स्थित आइसोलेशन सेंटर में विशेष चिकित्सीय निगरानी में रखा गया है। इनमें सात मालदीव के नागरिक समेत दो डिप्लोमेट भी शामिल हैं। आइसोलेशन सेंटर में वाई-फाई की सुविधा मुहैया कराई गई है। दिल्ली चुनाव से लेकर चीन के वुहान शहर तक की हर गतिविधि पर इनकी नजर है।

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आईटीबीपी के डॉक्टरों की टीम और प्रबंधन व सुरक्षा में लगे कर्मियों के साथ ये लोग काफी घुल मिल गए हैं। डॉक्टरी जांच के बाद जब भी इन्हें मौका मिलता है, तो वे आईटीबीपी कर्मियों के साथ खुलकर बात कर रहे हैं। भारत-चीन सीमा पर उनकी ड्यूटी कैसी रहती है, उनकी बारीकियों को लेकर वे जानना चाहते हैं। बॉर्डर पर कैसा माहौल होता है और जब आईटीबीपी जवान और चीनी सैनिक मिलते हैं, तो वे कौन सी भाषा का इस्तेमाल करते हैं।
 

आईटीबीपी के एक अधिकारी के मुताबिक, छावला स्थित आइसोलेशन सेंटर में रखे गए सभी लोगों का नियमित परीक्षण किया जा रहा है। अभी तक सभी लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव है। सेंटर में आईटीबीपी के डॉक्टरों की टीम और प्रबंधन एवं सुरक्षा के लिए तैनात जवान आपस में इस तरह रह रहे हैं जैसे कि वे किसी खेल समारोह में भाग लेने के लिए आए हैं।

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उनके चेहरे पर कोई खौफ नहीं है। उन्हें जब भी समय भी मिलता है, वे आईटीबीपी कर्मियों से बातचीत करते हैं। कोई उन्हें सर कहता है, तो कोई भैया कह कर बुलाता है। ये लोग बिना किसी झिझक के जवानों से बात करते हैं। उन्हें कुछ चाहिए होता है, तो वे तुरंत बोल देते हैं। जवान चूंकि वर्दी में होते हैं, तो वे उनकी ड्यूटी के बारे में भी जानने का प्रयास करते हैं।

कुछ ऐसे सवाल भी होते हैं जैसे कि आप भारत-चीन सीमा पर तैनात हैं। वहां बॉर्डर पर कैसी परिस्थितियां रहती हैं, मौसम का मिजाज, चीनी सैनिकों की हलचल, उनके साथ संवाद के लिए कौन सी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, आदि सवाल पूछते हैं। इनका उन्हें जवाब भी मिलता है।

आईटीबीपी वाले उन्हें इस बात का जरा भी अहसास नहीं होने देते कि वे कोरोना वायरस की जांच के लिए आइसोलेशन सेंटर में हैं। वहां पर आईटीबीपी के 30 डॉक्टरों और सहयोगियों की टीम है। यह टीम जब उन लोगों से कुछ पूछती है, तो वे जोश भरे लहजे में बात करते हैं। आपस में मजाक भी होता है। इसके अलावा वहां करीब 40 जवान ऐसे हैं जो प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्य में लगे हैं। उनकी ड्यूटी बदलती रहती है। जैसे ही कोई दूसरा जवान वहाँ पर आता है, तो चीन से आए लोग उनके साथ भी आत्मीयता से बतलाते हैं।
 

आईटीबीपी अधिकारी के मुताबिक वे लोग दिल्ली चुनाव से संबंधित खबरें भी देखते रहते हैं। वे उन पर चर्चा भी करते हैं। हालांकि सभी लोगों को वाई-फाई सुविधा मुहैया कराई गई है, लेकिन बहुत से लोग टीवी पर ऐसी न्यूज देखते हैं। वे कहते हैं कि हमें भी कोरोना वायरस से जंग जीतनी है।

 

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