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कोरोना वायरस: जानिए क्यों हुआ कोविशील्ड वैक्सीन की दूसरी डोज का लंबा अंतराल, विशेषज्ञों ने बताई ये वजह

Mon, 22 Mar 2021 07:21 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कोविड से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता कम बन रही थी, इसलिए अंतराल बढ़ाया गया
  • वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया कि 4-6 हफ्ते में दी जाने वाली पहली वैक्सीन और दूसरी डोज के बीच में रोग-प्रतिरोधक क्षमता पचास फीसदी ही बन पाती थी
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कोविशील्ड वैक्सीन - फोटो : twitter@serum institute
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विस्तार
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कोविशील्ड वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज के बीच में जितना अंतराल था, उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता उतनी नहीं बन रही थी, जितनी कोरोना वायरस से लड़ने के लिए ज़रूरी थी। यही वजह रही कि कोविशील्ड वैक्सीन की दूसरी डोज के अंतराल को बढ़ा दिया गया। वैक्सीन की डोज के अंतराल को बढ़ाने के लिए बनाई गई कमेटी के सदस्य और आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉक्टर समीरन पांडा के मुताबिक ऐसा करके वैक्सीन की क्षमता और उसके प्रभाव का और बेहतर परिणाम सामने आएगा।

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केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह की समीक्षा के बाद सोमवार को फैसला लिया कि दोनों खुराक के बीच समय अंतराल 4-6 सप्ताह की जगह 4-8 सप्ताह तक का होगा। सलाहकार समूह के सदस्य डॉक्टर समीरन पांडा ने अमर उजाला डॉट कॉम से बातचीत में कहा कि वर्तमान में कोरोना की कोविशील्ड वैक्सीन की दो डोज एक निर्धारित समय के अंतराल में दी जा रही हैं। लंबे समय अंतराल में वैक्सीन की दोनों खुराक का असर अलग-अलग देखा गया है।

दोनों वैक्सीन डोज में 4-8 सप्ताह के अंतराल होने पर वैक्सीन की प्रभावकारिता अधिक देखी गई, जबकि चार-छह सप्ताह के अंतराल में दोनों डोज देने पर पचास फीसदी या इससे थोड़ी अधिक प्रभावकारिता देखी गई। प्रभावकारिता के इस अंतराल को अधिक प्रमाणित करने के लिए जिन लोगों को वैक्सीन लगाई गई उन पर अध्ययन किया गया।
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डॉक्टर पांडा ने कहा कि विदेश में कोविशील्ड के की दूसरी डोज के लिए 12 हफ्ते का समय तय किया जा रहा है। लेकिन हमारी अपनी रिसर्च के मुताबिक ऐसी महामारी में यह वक़्त बहुत ज्यादा है। क्योंकि तीन महीने के समय में बहुत कुछ बदल सकता है। जिसमें वायरस के म्यूटेशन का बदलाव भी शामिल हो सकता है। यह भी संभव है कि वैक्सीन की एक डोज लेने के बाद तीन महीने के इंतजार के दौरान लोग कहीं और शिफ्ट कर जाएं या शहर ही बदल लें, इसलिए कोरोना टीकाकरण को इस तरह समयबद्ध किया जाएं कि कम समय में अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन दिया जा सके।

अगर वैक्सीन के उत्पादन, उपलब्धता, आपूर्ति, संरक्षण और अन्य संसाधनों से संबंधित परेशानी नहीं है तो कोरोना के लिए विशेषज्ञ कई शॉट की जगह सिंगल शॉट वैक्सीन को ही अधिक पसंद करेंगे, विशेष कर ऐसे समय में जब हमें तुरंत वायरस को नियंत्रित करना है। डॉक्टर पांडा कहते हैं कि इस दिशा में भी शोध जारी है।

उन्होंने कहा कि कोवैक्सिन वैक्सीन में समय सीमा नहीं बढ़ाई गई है। उसकी वजह बताते हुए ने कहा कि इस वैक्सीन को भारतीय भौगोलिक दशाओं के अनुरूप तैयार किया गया है। वैक्सीन लगाने के बाद जो रोग प्रतिरोधक क्षमता तय अंतराल में होनी चाहिए, उतनी हो रही है इसलिए इस वैक्सीन में कोई भी समय अवधि का परिवर्तन नहीं किया गया है।

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