पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग से बात की थी। उसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने अपने राज्य में लॉकडाउन बढ़ाने की बात कही थी। वहीं उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, असम और मध्य प्रदेश भी इसके पक्ष में हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड ने साफ संकेत दे दिया है कि 14 अप्रैल के बाद भी वे पाबंदियों को पूरी तरह नहीं हटाएंगे।
उपराष्ट्रपति ने भी दिए संकेत
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी लॉकडाउन बढ़ने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से निकलने के लिए इसका अंतिम सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण है। नायडू ने कहा कि 14 अप्रैल के बाद जो भी फैसला हो, लोग उसका उसी तरह से पालन करें जैसे अब तक करते आए हैं। हो सकता है कि 14 अप्रैल के बाद भी कुछ हद तक परेशानी हो। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के संकट पर किसी और दिन चिंता की जा सकती है मगर स्वास्थ्य पर नहीं।
सांसदों के वेतन में 30 फीसदी की कटौती के बाद अब केंद्र के 60 लाख कर्मचारियों के वेतन में भी 25 से 30 फीसदी की कटौती हो सकती है। एक यूनियन के पदाधिकारी के मुताबिक वे इस बारे में कर्मचारियों से बातचीत कर रहे हैं। इससे पहले मार्च में अधिकतर सरकारी विभागों के कर्मचारियों ने अपनी एक दिन की तनख्वाह इस फंड में दान करने की घोषणा की थी।
आर्थिक नुकसान से सरकार चिंतित
लॉकडाउन से होने वाले आर्थिक नुकसान को लेकर सरकार चिंतित है। न केवल मैन्युफैक्चरिंग बल्कि सेवा क्षेत्र को भी काफी नुकसान हुआ है। सरकार को कर के जरिये मिलने वाली राशि में भी कमी आई है। लॉकडाउन जितना लंबा चलेगा, आर्थिक नुकसान उतना ज्यादा होगा। लेकिन लॉकडाउन जल्दबाजी में खत्म करने से महामारी के फैलने का खतरा भी है।