चंडीगढ़ में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए एक घर को चिह्नित करते हुए स्वास्थ्य कर्मचारी।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल 7447 मरीजों में वायरस की पुष्टि के बाद कुल 239 लोगों की मौत दर्ज हुई है। इस आधार पर यहां मृत्यु दर 3.21 है। वहीं अमेरिका में 7087 मरीजों पर केवल 100 रोगियों की मौत हुई थी और मृत्यु दर 1.41 फीसदी थी। जर्मनी में 7,156 रोगियों में केवल तेरह की मौत हुई और यहां मृत्यु दर 0.18 फीसदी थी। चीन में जब 7,736 मरीज वायरस से ग्रसित थे उस वक्त 170 रोगियों की मौत हुई और उस वक्त मृत्यु दर 2.2 थी।
दस हजार का आंकड़ा पार तो बिगड़े हालात
कोरोना से बुरी तरह प्रभावित सभी देशों में स्थिति तब खराब हुई जब संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 10 हजार के पार पहुंचा। इसमें अमेरिका से लेकर ब्रिटेन, इटली और स्पेन शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दस हजार का आंकड़ा पार होने के बाद वायरस यहां और आक्रामक दिखा और रोजाना औसतन 450 से 500 मरीजों में वायरस की पुष्टि हुई जबकि रोजाना होने वाली मौतों का आंकड़ा भी इससे अधिक था। इसी का नतीजा है कि अमेरिका से लेकर ब्रिटेन, स्पेन और इटली में वायरस हाहाकार मचा रहा है जिसके आगे सब बेबस और लाचार हैं।
डब्ल्यूएचओ की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार जब दुनिया के नौ देशों में मरीजों का आंकड़ा सात से आठ हजार के बीच था तब ब्रिटेन, स्पेन, इटली और बेल्जियम में हालात भारत से भी बदतर थे। ब्रिटेन में तब तक 409, बेल्जियम में 289, इटली में 366 और स्पेन में 288 लोगों की मौत हो चुकी थी।
9 देशों की सूची में भारत 5वें पायदान पर
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के नौ देश जहां सबसे पहले सात हजार मरीजों में वायरस की पुष्टि हुई और मौतों का ग्राफ बढ़ा, उसमें भारत पांचवें पायदान पर है। इस सूची में सबसे कम मौतों के आंकड़े के साथ जर्मनी पहले, अमेरिका दूसरे, चीन तीसरे और फ्रांस चौथे नंबर पर था।