चीनी कंपनियों की किट पर कई देशों ने सवाल खड़े किए हैं। स्लोवाक, स्पेन, तुर्की और अमेरिका के कुछ राज्यों ने चीन से मंगाई गई इन रैपिड जांच किट्स को इस्तेमाल किया था, लेकिन गुणवत्ता न मिलने पर वापस कर दिया गया। तुर्की में इन किट्स की गुणवत्ता 35 तो स्पेन में 20 फीसदी ही थी। वहीं नियमानुसार गुणवत्ता 70 से 80 फीसदी तक होनी चाहिए।
चीनी दूतावास ने कहा- मामला गंभीर, करेंगे मदद
दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने कहा है, चीन से आने वाले स्वास्थ्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर वह बेहद गंभीर है और इसमें भारत की मदद करेगा। दूतावास ने कहा, भारत को प्रमाणित कंपनियों से ही सामग्री लेनी चाहिए। ऐसी कंपनियों से ही मेडिकल सामग्री खरीदें, जिसे चीन के अधिकारियों ने सत्यापित किया है।
क्या राज्य अपनी चूक पर डाल रहे पर्दा?...
कई राज्यों ने तो चीन की दोनों कंपनियों वांडोफ बायोटेक और लिवजोन डायग्नोस्टिक से रैपिड टेस्ट किट्स सीधे खरीदी थीं। तमिलनाडु ने दो बार में 24 और 34 हजार किट और छत्तीसगढ़ ने दक्षिण कोरिया की कंपनी एसडी बायोसेंसर को 75 हजार किट्स का ऑर्डर दिया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र से मिली आर्थिक सहायता के जरिए इन किट्स को खरीदा जा रहा है। दिल्ली में इसी बजट से स्वदेशी कंपनी मायलैब की किट्स का इस्तेमाल आरटी पीसीआर में किया जा रहा है। लेकिन अब इन राज्यों का कहना है कि आईसीएमआर से मान्यता प्राप्त कंपनियों को ही ऑर्डर दिए गए।
इसलिए लगानी पड़ी तत्काल रोक
छत्तीसगढ़ में चार हजार में से 200 किट्स की जांच में एक पॉजिटिव मिला था। आरटी पीसीआर जांच में वह निगेटिव मिला। गुजरात को मिलीं किट्स में से एक हजार किट्स की जांच में करीब 10 फीसदी परिणाम ही मिले हैं। जबकि राजस्थान में 5 तो पश्चिम बंगाल में 2 या 3 फीसदी परिणाम ही मिले हैं। इसलिए अब इसकी दोबारा जांच जरूरी है।
23 कंपनियों के बैच को दी है मान्यता...
पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी इसकी मान्यता दे रहा है। अब तक 23 कंपनियों के बैच को मान्यता दी जा चुकी है जिनमें 9 स्वदेशी भी शामिल हैं। चीन, कोरिया, अमेरिका, नीदरलैंड इत्यादि देशों की इन कंपनियों को अब तक 51 लाख रैपिड टेस्ट किट्स के ऑर्डर भी दिए जा चुके हैं लेकिन आपूर्ति अभी तक चीनी कंपनियों से ही हुई है।
दो बार में चीन से आईं किट्स
पिछले पांच दिन में चीनी कंपनियों से 8.5 लाख जांच किट्स प्राप्त हो चुकी हैं। जिसका पहला बैच (5.5 लाख किट्स) बीते 16 अप्रैल को भारत आया, जिन्हें 18 अप्रैल तक प्रभावित राज्यों को उपलब्ध भी करा दिया गया। दूसरी बार 21 अप्रैल को 3 लाख किट्स भारत आई हैं। इनमें 80 हजार किट्स राजस्थान और तमिलनाडु में मंगाए गए थे।