हाथरस के 34 वर्षीय मोनू वेटर का काम करता है। उसकी पत्नी, मां और दो बच्चे गांव में रहते हैं। उसने बताया कि होली के दौरान उसने परिवार को कुछ पैसे भेजे थे, जो अब पूरी तरह खत्म हो गए हैं। लॉकडाउन के कारण अब न काम है और न कमाई क्या करें समझ नहीं आ रहा।
यह दो-चार नहीं अनगिनत मजदूरों की अंतहीन दास्तान है, जो काम धंधे की तलाश में हरियाणा, राजस्थान, बिहार, बंगाल आदि राज्यों से देश के अन्य शहरों में पहुंचे थे, लेकिन लॉकडाउन में फंसे हुए हैं।