इस बीच, देश में अब तक तक कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 11,933 हो गई है, जबकि इससे 392 लोगों की मौत हुई है। पिछले 24 घंटों में 1,118 नए संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं। जबकि 39 लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, राहत की खबर है कि अब देश में 11.41 फीसदी के औसत से संक्रमित मरीज स्वस्थ भी हो रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बुधवार शाम तक देश में 1,343 मरीज स्वस्थ्य होकर घर जा चुके हैं।
गंभीर मामलों के देश में कोविड अस्पताल
अग्रवाल ने बताया कि कैबिनेट सचिव की राज्यों के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों, स्वास्थ्य सचिवों, जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों के साथ बुधवार को हुई बैठक में हॉटस्पॉट के रोकथाम की रणनीति पर चर्चा हुई। उन्होंने फिर दोहराया कि देश में अभी सामुदायिक संक्रमण के कोई सुबूत नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों के देशभर में कोविड अस्पताल बनाए जाएंगे, जबकि हल्के मामलों के लिए कोविड डे केयर सेंटर होंगे। वहीं, गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, जो जिले हॉटस्पॉट के दायरे में नहीं आते हैं, वहां 20 अप्रैल से लॉकडाउन में कुछ रियायतें दी जाएंगी। छूट के बावजूद लोगों को सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा। अगर कहीं से नियमों के तोड़ने की खबर आएगी तो उन्हें दी हुई रियायतें तुरंत वापस ले ली जाएंगी।
रणनीति: संक्रमण वाले इलाकों में मरीजों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे
संयुक्त सचिव ने कहा कि 20 अप्रैल तक देश के सभी जिलों में कोरोना संक्रमण को रोकने के उपायों का सख्ती से पालन और आकलन सुनिश्चित किया जाएगा। अग्रवाल ने कहा कि इन जिलों के सर्वाधिक संक्रमण प्रभावित इलाकों में मरीजों की शीघ्र पहचान करने के लिए घर घर जाकर सर्वे किया जाएगा। इसके तहत जिले के स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के अधिकारी घर घर जाकर खांसी, बुखार और सांस की तकलीफ वाले मरीजों की पहचान कर यह सुनिश्चित करेंगे कि इनमें कोरोना का संक्रमण तो नहीं है।
यह दुर्लभ, हजार साल में वायरस चमगादड़ों से इंसानों में पहुंचा
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के रमन आर गंगाखेड़कर ने कहा कि चीन में हुई खोज में ऐसी बात सामने आई थी कि चमगादड़ों में अचानक हुए जैविक उत्परिवर्तन के कारण कोरोना वायरस पनपा है। फिर यह पैंगोलिन में गया और वहां से यह वायरस इंसान में आया। हमने भी इस दावे की पड़ताल की है। दो प्रकार के चमगादड़ों में कोरोनावायरस मिला, लेकिन यह इंसान को नुकसान पहुंचाने के काबिल नहीं था। यह बहुत दुर्लभ है कि एक हजार साल में वायरस चमगादड़ों से इंसान तक पहुंचता है।