वायरस जब श्वास नलिका से होते हुए सांस लेने में मदद करने वाले अंगों और फेफड़ों की कोशिकाओं में पहुंचता है तो स्थिति खराब होती है। इसमें व्यक्ति को सीने में दर्द, कफ और सांस लेने में तकलीफ होती है क्योंकि वायरस के कारण सांस लेने में इस्तेमाल होने वाले सभी अंगों में सूजन आ जाती है।
खून में ऑक्सीजन की कमी, मल्टी ऑर्गन फेल्योर
वायरस एल्वियोली (फेफड़ा या फुप्फुस) को भी प्रभावित करता है जिसका काम खून में ऑक्सीजन पहुंचाना होता है। इसके अलावा कार्बन-डाईऑक्साइड को निकालना होता है। एल्वियोली में सूजन आती है और इसमें पानी या पस भर जाता है जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। रक्त में ऑक्सीजन भी कम मात्रा में पहुंचती है। इस कारण हालात मल्टी ऑर्गन फेल्योर के हो जाते हैं।
अमेरिका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. जेफरी टॉबेनबर्गर बताते हैं कि फेफड़ों को जब नुकसान पहुंचता है शरीर तुरंत उसकी मरम्मत की कोशिश में लग जाता है। अगर ये प्रक्रिया सफल हो जाती है तो संक्रमण कुछ दिन में ठीक हो सकता है। कुछ मामलों में इम्युन सिस्टम गलती भी कर जाता है जिससे वायरस फेफड़ों के भीतर पहुंच स्वस्थ कोशिका को नुकसान पहुंचा सकता है।