कोरोना महामारी की दूसरी लहर पहले की अपेक्ष अधिक घातक रही है। कोरोना की दूसरी लहर में में डेल्टा वेरिएंट (B.1.617.2) हर रोज लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। देश में कोरोना संक्रमण के मामले कम होने के साथ ही एक और अच्छी खबर है कि इसकी रोकथाम में भारत बायोटेक की कोवैक्सीन असरदार बताई जा रही है। हाल ही में हुए शोध में खुलासा हुआ है कि कोवैक्सीन कोविड के खतरनाक वैरिएंट बीटा और डेल्टा वैरिएंट से सुरक्षा प्रदान करती है।
कोवैक्सीन की न्यूट्रलाइजेशन क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए किए गए शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि बीटा और डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ न्यूट्रलाइजेशन टाइटर्स यानी एंटीबॉडी को बेअसर करने की एकाग्रता में तीन गुना कमी पाई गई थी। इससे साफ जाहिर है कि कोवैक्सीन बीटा और डेल्टा वैरिएंटस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाती है। बता दें कि कोविड-19 का खतरनाक डेल्टा वैरिएंट के मामले भारत में आए थे, जबकि जबकि बीटा वैरिएंट (B.1.351) की खोज पहली बार दक्षिण अफ्रीका में हुई थी। शोध में मालूम चला है कि इन दोनों वैरियंट के खिलाफ कोवैक्सीन प्रभावी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत में मिले कोरोना वायरस के वैरिएंट बी.1.617.1 और बी.1.617.2 को कप्पा और डेल्टा का नाम दिया है। शोध में यह पता चला कि यह यूके में पहली बार पाए गए अल्फा वैरिएंट की तुलना में 50 फीसदी से अधिक डेल्टा वैरिएंट अधिक खतरनाक है, जो बहुत तेजी से लोगों को संक्रमित करता है।
कौन सा वैरिएंट सबसे अधिक घातक?
वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि मौतों या मामलों की अधिक गंभारता में डेल्टा वैरिएंट की भूमिका का अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है। डब्ल्यूएचओ ने बयान जारी डेल्टा वैरिएंट को अल्फा से अधिक घातक बताया है। बता दें कि पिछले साल अक्तूबर में भारत में पाए जाने वाले स्ट्रेन (B.1.617.1) को 'कप्पा' नाम दिया गया था।
बता दें कि इस शोध में 552 हेल्थवर्कस को शामिल किया गया, जिसमें 325 पुरुष और 227 महिलाएं थीं। 456 को कोविशील्ड और 96 को कोवैक्सीन की पहली डोज दी गई और इसके बाद नतीजे आए।
आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने मिलकर किया शोध
वैक्सीन को लेकर किया गया शोध पुणे के नेशनल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और भारत बायोटेक ने मिलकर किया है। इस स्टडी की कॉपी को एनआईवी, आईसीएमआर और भारत बायोटेक के शोधकर्ताओं की ओर से बाइरोक्सिव नाम की एक वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। बता दें कि कोवैक्सीन का निर्माण भारत बायोटेक, आईसीएमआर और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) एक साथ मिलकर कर रहे हैं।
बता दें कि कोवैक्सीन 2 साल से 18 साल तक के बच्चों पर भी ट्रायल कर रही है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने 12 मई को ही 2 से 18 साल एजग्रुप वैक्सीन के फेज 2/3 ट्रायल को मंजूरी दे दी है।