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Coronavirus मिथक और सत्य: क्या गर्मी बढ़ने से घटेगा संक्रमण, जानिए कई सवालों के जवाब

Thu, 05 Mar 2020 02:43 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोनावायरस से बचाव के लिए मास्क लगाए लोग - फोटो : PTI
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चीन के वुहान शहर से फैला कोरोनावायरस भारत समेत दुनिया के 70 देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। इस वायरस के प्रभाव से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तीन हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है वहीं लगभग 90 हजार लोग संक्रमित बताए जा रहे हैं। भारत में भी अब तक कोरोनावायरस के 29 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। 

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दुनिया भर में कोरोनावायरस को लेकर बने माहौल से कई अफवाहों को भी बल मिला है। लोग तमाम तरह के मिथकों को कोरोनावायरस को रोकने के उपाय के तौर पर प्रयोग कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनियाभर में फैले मिथकों को लेकर सलाह जारी की है। यहां जानिए कोरोनावायरस से जुड़े मिथक और सत्य: 
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मिथक: तापमान के बढ़ने से कोरोनावायरस का प्रभाव कम होगा!
सत्य: कई शोध में ऐसा दावा किया गया है कि तापमान के बढ़ने से कोरोनावायरस का प्रभाव कम होगा। हालांकि इसे लेकर किसी भी वैज्ञानिक या संस्थान ने पुष्टि नहीं की है। अगले एक-दो महीनों में तापमान में वृद्धि होने पर ही इसकी पुष्टि हो पाएगी कि कोरोना के वायरस गर्मी से कितने प्रभावित होते हैं।

मिथक: कोरोनावायरस को हेंड ड्रायर से मारा जा सकता है!
सत्य: कोरोनावायरस को हेंड ड्रायर से नहीं मारा जा सकता है। इस वायरस से बचने के लिए आपको अक्सर अपने हाथों को अल्कोहल मिश्रित हेेंड वॉश से धोना चाहिए। जब आपके हाथ साफ हो जाएं तब आप टिश्यू पेपर या फिर वार्म एयर ड्रायर से हाथों को अच्छी तरह सुखा लें।

मिथक: अल्ट्रावायलेट लाइट स्टरलाइजर कोरोना के कीटाणुओं को खत्म कर सकते हैं!
सत्य: अल्ट्रावायलेट लाइट स्टरलाइजर का प्रयोग कभी भी हाथों या त्वचा को कीटाणुरहित बनाने में नहीं करना चाहिए। अल्ट्रावायलेट विकिरण से त्वचा जल सकती है।

मिथक: कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों का पता लगाने में थर्मल स्कैनर उपयोगी हैं!
सत्य: थर्मल स्कैनर्स से उन लोगों का पता लगाया जा सकता है जो कोरोनोवायरस के संक्रमण के कारण बुखार से पीड़ित हैं। हालांकि, इससे उन लोगों का पता नहीं लगाया जा सकता जो कोरोनावायरस से संक्रमित तो हैं लेकिन उन्हें बुखार नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना के संक्रमित व्यक्ति के शरीर में बुखार के लक्षण दो से 10 दिन बाद दिखाई देता है।

मिथक: शरीर पर अल्कोहल या क्लोरीन के छिड़काव से कोरोनावायरस को मारा जा सकता है!
सत्य: शरीर पर अल्कोहल या क्लोरीन के छिड़काव से आपके अंदर पहले से मौजूद कोरोनावायरस नहीं मरेंगे।  अल्कोहल या क्लोरीन के छिड़काव आपके कपड़े और आंख, मुंह जैसे अंगो के लिए घातक हो सकता है। बता दें कि अल्कोहल और क्लोरीन दोनों ही फर्श को कीटाणुरहित बनाने में उपयोगी हो सकते हैं लेकिन कोरोना को लेकर ये प्रभावी नहीं हैं।

मिथक: चीन से आने वाले पत्र या कोई पार्सल को प्राप्त करना हानिकारक है!
सत्य: चीन से आने वाले पत्र या कोई पार्सल को प्राप्त करने से कोरोनावायरस को फैलने का कोई खतरा नहीं है। पुराने विश्लेषण से यह पता चला है कि ये वायरस वस्तुओं पर ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहते हैं।

मिथक: प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले पालतू जानवर भी कोरोनावायरस को फैला रहे हैं!
सत्य: अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कोई पालतू जानवर जैसे कुत्ता या बिल्ली कोरोनावायरस का संक्रमण फैला रहे हैं। हालांकि पालतू जानवरों के संपर्क के बाद अपने हाथों को साबुन और पानी से जरूर धोएं। यह आपको ई कोली और साल्मोनेला जैसे जीवाणुओं से संक्रमित होने से बचाता है। गुरुवार को हांगकांग में एक कुत्ते के कोरोना से प्रभावित होने की खबरें आई थीं, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

मिथक: निमोनिया के टीके कोरोनावायरस से बचा सकते हैं!
सत्य: निमोनिया के टीके जैसे न्यूमोकोकल वैक्सीन और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (एचआईबी) वैक्सीन से कोरोनावायरस नहीं मरते हैं, ना ही ये टीके आपको प्रभावित होने से बचा सकते हैं। कोरोनावायरस इतना नया और अलग है कि इसे विशेष तौर पर इसी बीमारी के लिए बनाए गए टीके से ही रोका जा सकता है। 

मिथक: खारे पानी (नमकीन पानी) से रोजाना नाक साफ करने से कोरोनावायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है!
सत्य: इसका कोई सबूत नहीं है कि खारे पानी से रोजाना नाक साफ करने से कोरोनावायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है। हां, खारे पानी से नाक साफ करने से सामान्य सर्दी से जल्दी ठीक हुआ जा सकता है। 

मिथक: लहसुन खाने से कोरोनावायरस से संक्रमण को रोका जा सकता है!
सत्य: लहसुन में रोगाणुरोधी गुण होते हैं। फिर भी इस बात का कोई सबूत नहीं है कि लहसुन के खाने से कोरानावायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है।
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मिथक: तिल का तेल लगाने से शरीर में कोरोनावायरस का प्रभाव नहीं होता है!
सत्य: तिल का तेल कोरोनावायरस को नहीं मारता है। ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है।

मिथक: कोरोनावायरस ज्यादा उम्र के लोगों को अधिक प्रभावित करता है!
सत्य: कोरोनावायरस से सभी उम्र के लोग संक्रमित हो सकते हैं। अधिक उम्र के लोग जो कई अन्य बीमारियों जैसे अस्थमा, मधुमेह या हृदय रोग आदि से पीड़ित होते हैं वे कोरोना से प्रभावित होने पर ज्यादा कमजोर दिखाई देने लगते हैं। 

मिथक: एंटीबायोटिक्स कोरोनावायरस को रोकने और इलाज में प्रभावी हैं!
सत्य: एंटीबायोटिक्स किसी भी वायरस के खिलाफ प्रभावी नहीं होता। यह सिर्फ बैक्टीरिया के खिलाफ काम करता है। एंटीबायोटिक्स को रोकथाम या उपचार के साधन के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि कोरोना से प्रभावित मरीजों को एंटीबायोटिक्स दिया जा रहा है क्योंकि अगर उन्हें कोई अन्य बैक्टीरिया का संक्रमण हो तो वह खत्म हो जाए।

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