कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों को अब भी यह भ्रम कि एक बार वायरस से संक्रमित होने बाद वह दोबारा इस वायरस के चपेट में नहीं आ सकते हैं। लेकिन भारत के कई राज्यों में ऐसे केस आए हैं, जहां मरीज ठीक होने के बाद फिर से कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। ऐसा ही मामला इंदौर में भी देखा गया। इस तरह के मामलों के सामने आने से लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
दूसरी बार हुआ कोरोना
स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले रघुवंशी (33) की कोरोना रिपोर्ट दोबारा पॉजिटिव आई है। कुछ दिन पहले उनके बेटे को बुखार आया था। चार दिन तक तबीयत ठीक न होने के बाद कोरोना का टेस्ट कराया। जांच में वह पॉजिटिव निकला। बेटे के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद पूरे परिवार ने 29 नवंबर को कोरोना टेस्ट कराया। तो जांच रघुवंशी भी कोविड पॉजिटिव निकले। इसके बाद उन्होंने खुद को होम आइसोलेट कर लिया। रघुवंशी को पहली बार 26 जुलाई को कोरोना हुआ था। तब 10 दिन तक वह निजी अस्पताल में थे। रिपोर्ट निगेटिव आने पर उनको डिस्चार्ज किया गया था। रघुवंशी स्वास्थ्य विभाग में कोविड अस्पताल समन्वयक हैं। दूसरी बार कोरोना का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और विभाग सतर्क हो गए। इससे पहले भी शहर में ऐसे तीन केस सामने आ चुके हैं।
एंटीबॉडी न बनने के कारण लोग हो रहे दोबारा संक्रमित
कोरोना से ठीक होने के बाद दो-तीन हफ्तों में कोविड इम्युनोग्लोबिन एंटीबॉडी बनने लगती है। डॉक्टर्स का कहना है कि फिर से संक्रमित होने का मतलब है कि शरीर में सही से एंटीबॉडी नहीं बन रही है या फिर एंटीबॉडी खत्म हो गई है। जिसकी वजह से वायरस ने फिर से शरीर में प्रवेश कर लिया है।
सिर्फ 30 फीसदी लोगों में मिल रही है एंटीबॉडी
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग के प्रमुख अशोक यादव का कहना है कि एंटीबॉडी बहुत कम लोगों में मिल रही है। जितनी जांचे की गई हैं उनमें सिर्फ 30 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिल रही है। लोगों के शरीर से जल्दी से एंटीबॉडी क्यों खत्म हो रही है। इसके बारे में हमें गहन अध्ययन करने की जरूरत है।