प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के.विजय राघवन ने बुधवार को एक साक्षात्कार में कहा कि भारत में पाए जाने वाले तथाकथित "डबल म्यूटेशन" कोरोना वायरस के खतरनाक प्रभाव और प्रसार की वजह से इसे चिंता का एक प्रकार (वेरिएंट ऑफ कंसर्न) भी माना जा सकता है। यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि यह वेरिएंट ("डबल म्यूटेशन" वेरिएंट) चिंता का एक विषय है क्योंकि अभी तक यह वेरिएंट काफी लोगों में पाया जा चुका है। इसे खतरनाक वेरिएंट सिर्फ इसलिए नहीं कहा जा रहा है क्योंकि ज्यादा संख्या में पाया गया है, बल्कि इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इस म्यूटेशन की वजह से काफी लोगों में शारीरिक समस्या भी देखने को मिल रही है।
डबल म्यूटेशन, एक विशिष्ट परिवर्तनों को संदर्भित करता है, जिसे ई484क्यू (ग्लूटामेट को स्पाइक प्रोटीन के 484वें स्थान पर ग्लूटामाइन द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है) और एल452आर (452वें स्थान पर ल्यूसीन को आर्जिनिन के साथ प्रतिस्थापित किया गया है) द्वारा दर्शाया गया है। इन दोनों म्यूटेशनों की जांच की जा रही है।
नए वेरिएंट पर कम असरदार हाे सकती है वैक्सीन
अभी तक बाजार में आए टीके शायद ही इस नए वेरिएंट से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। टीके कभी-कभी हल्के और मध्यम रोग को कम सुरक्षा प्रदान करते हैं लेकिन वे गंभीर रूप से बीमार होने के खतरे का जरूर टाल सकते हैं।
एक-दो हफ्तों में कमजोर पड़ सकता है नया वेरिएंट
प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा कि मेरा मानना है कि संक्रमण की वर्तमान लहर एक या दो सप्ताह में कमजोर पड़ना शुरू हो सकती है। कुछ सप्ताह पहले काेरोना वायरस संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए किए गए प्रयासों की वजह से बहुत जल्द इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। अगर आगे भी यह प्रयास जारी रहेंगे तो आप भविष्य में भी इसके प्रभाव देख पाएंगे।