भारत सरकार ने मंगलवार को पद्म पुरस्कारों का एलान किया। कुल 128 लोगों को पद्म सम्मान से नवाजा जाएगा। इनमें चार लोगों को पद्म विभूषण, 27 को पद्मभूषण और 107 लोगों को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। पद्मभूषण से जिन लोगों को नवाजा जाएगा, उनमें भारत बायोटेक के कृष्णा एल्ला और सुचित्रा एल्ला के साथ सीरम इंस्टीट्यूट के चेयरमैन सायरस पूनावाला भी शामिल हैं। ये दोनों कंपनियां भारत में वैक्सीन निर्माण से जुड़ी हैं। सरकार ने पद्म पुरस्कार देकर वैक्सीन बनाने वालों को सम्मान दिया है। आइए जानते हैं कि देश के वैक्सीन कार्यक्रम में इन तीनों हस्तियों का क्या योगदान रहा है।
कौन हैं कृष्णा और सुचित्रा एल्ला?
भारत बायोटेक देश की इकलौती स्वदेसी वैक्सीन कोवाक्सिन का बना रही है। इस कंपनी के संस्थापक, चेयरमैन और एमडी हैं डॉ. कृष्णा एल्ला और उनकी पत्नी डॉ. सुचित्रा एल्ला। डॉ. एल्ला यीस्ट मॉल्यूकुलर बायोलॉजिस्ट हैं। तमिलनाडु के वेल्लोर जिले से आने वाले डॉ. एल्ला का परिवार खेती करता था। वह रोटरी की फ्रीडम फ्रॉम हंगर फेलोशिप पर उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए थे। विस्कॉन्सिन-मेडिसिन विश्वविद्यालय से पीएचडी करने के बाद एल्ला दक्षिण कैरोलीना की मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ाने लगे। इसके बाद देश लौटकर उन्होंने अपनी पत्नी सुचित्रा के साथ मिलकर 1996 में हैदराबाद में भारत बायोटेक की स्थापना की।
कोवाक्सिन से पहले भी बना चुके हैं कई टीके
भारत बायोटेक पहली बार तब चर्चा में आई, जब कंपनी ने हेपटाइटिस-बी की वैक्सीन रेवैक-बी लॉन्च की। 1998 में बाजार में आई यह वैक्सीन उस वक्त की मौजूद दूसरी वैक्सीन से करीब 25 फीसदी सस्ती थी। इसके बाद कंपनी ने पोलियो की वैक्सीन बनाई। इन दोनों वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी मंजूरी मिली। कंपनी ने स्वदेसी रूप से रोटावायरस की वैक्सीन बनाई और उसे लॉन्च किया। बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए इस वैक्सीन का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा कंपनी टाइफाइड कंजुगेट वैक्सीन (टीसीवी), जापानी इंसेफेलाइटिस वैक्सीन, इन्फ्लुएंजा वैक्सीन और फाइव-इन-वन पेंटावैलेंट वैक्सीन भी बना चुकी है।
कोरोना की स्वदेसी वैक्सीन बनाकर बढ़ाया देश का मान
भारत बायोटेक को सबसे बड़ी सफलता तब मिली, जब कंपनी ने कोरोना की वैक्सीन बनाई। कंपनी के मालिक कृष्णा और सुचित्रा एल्ला ने वैक्सीन बनाने के लिए SARS-CoV-2 स्ट्रेन का उपयोग करने के लिए ICMR के साथ शुरुआती सहयोग किया। भारत बायोटेक ने एक रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से वायरस को विकसित और निष्क्रिय करके वैक्सीन बनाने में सफलता पाई। 16 जनवरी 2021 को जब देश में वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू हुआ तो भारत बायोटेक की कोवाक्सिन भी लोगों को लगाई जानी शुरू हुई।
देश के 140 करोड़ से ज्यादा डोज लगी पूनावाला की कोविशील्ड
देश में अब तक 163 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज दी जा चुकी है। इसमें ज्यादातर लोगों को कोविशील्ड लगाई गई है। भारत में इस वैक्सीन का निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट कर रहा है। इस कंपनी के चेयरमैन सायरस पूनावाला को भी पद्मभूषण दिए जाने की घोषणा हुई है।
कौन हैं सायरस पूनावाला
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया वैक्सीन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। यह कंपनी हर साल पोलियो, टिटनेस, हेपिटाइटिस-बी और डिप्थीरिया जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए लगभग 150 करोड़ वैक्सीन डोज बनाती है। इसी वजह से सायरस पूनावाला को ‘दुनिया का वैक्सीन किंग’ भी कहा जाता है। सायरस पूनावाला ने साल 1966 में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की स्थापना की थी। आज उनकी कंपनी दुनियाभर के करीब 170 देशों में अलग बीमारियों की वैक्सीन की सप्लाई करती है। बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स के मुताबिक 2021 में सायरस पूनावाला देश के पांचवें सबसे अमीर शख्स हैं। कोरोना दौर में उनकी संपत्ति में भारी इजाफा हुआ है। 2020 में उनकी नेटवर्थ 7.5 अरब डॉलर थी, जो 2021 में बढ़कर 19 अरब डॉलर हो गई।