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कोरोना वैक्सीन: सिर्फ शरीर में एंटीबॉडी ही नहीं बनाता है कोविड का टीका, दूसरे दुष्प्रभावों को भी करता है कम

Fri, 11 Jun 2021 03:13 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिकों का कहना है कि कोई भी वैक्सीन एक बार लग जाये तो उसका असर बहुत दिनों तक रहता है। डॉक्टर पांडा कहते हैं कि इतने दिनों तक असर रहता है कि अगर वायरस अपना स्वरूप बदलता भी है संक्रमण होने की संभावना हो तो भी वैक्सीन कारगर होती है...
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कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
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विस्तार
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अमूमन देश के अधिसंख्य लोगों में सिर्फ यही जानकारी है कि कोविड का टीका लगाने से शरीर में कोरोना जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ एंटीबॉडी बनने लगती हैं। जबकि हकीकत में सिर्फ ऐसा ही नहीं है। कोविड का टीका न सिर्फ शरीर में एंटीबॉडी बनाता है बल्कि उन कोशिकाओं को भी मजबूत करता है जो शरीर के अन्य हिस्से के ज़रूरी भागों में बीमारी की वजह से कमजोर होने लगती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसी वजह से टीका किसी भी बीमारी में न सिर्फ कारगर है बल्कि जीवन को बचाता है।

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आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक और कोविड के इलाज पर नजर रखने वाले डॉक्टर समीरन पांडा कहते हैं कि कोविड की वैक्सीन से दो तरह की इम्युनिटी बनती है। पहली इम्युनिटी न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी होती है, जो वायरस के शरीर में मौजूद होने की वजह से शरीर की किसी कोशिका को संक्रमित करने और अंदरूनी विकास को प्रभावित करने से रोकने लगती है। इसलिए टीका लगाने के साथ जो एंटीबॉडी बनती है उसको 'न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी' कहते हैं। जो उस रोग के खिलाफ शरीर के अंदर लड़ती है उसका दुष्प्रभाव रोक देती है। डॉक्टर समीरन कहते हैं कि सामान्यतया लोगों को यही पता होता है कि टीका एंटीबॉडी बनाता है।

डॉक्टर पांडा का कहना है कि एंटीबॉडी के अलावा 'सेल मीडिएटेड इम्युनिटी' भी टीका लगाने से बढ़ती है। यह वायरस कोशिकाओं के बीच में एक ऐसी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया है जिसमें एंटीबॉडी शामिल नहीं होती हैं। लेकिन वायरस की वजह से खराब हो चुकी कोशिकाएं और उसकी वजह से पड़ने वाले अन्य साइड एफ्फेक्ट्स को ये वैक्सीन दुरुस्त करती है। सेल मीडिएटेड इम्युनिटी के माध्यम से वैक्सीन का असर वायरस के गंभीर दुष्प्रभावों को कम करना भी है। इसलिए कोविड का टीका रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। जो कोशिकाओं के माध्यम से शरीर को दुरुस्त रखती हैं।

एक बार लगी वैक्सीन लंबे वक्त तक कारगर

आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिकों का कहना है कि कोई भी वैक्सीन एक बार लग जाये तो उसका असर बहुत दिनों तक रहता है। डॉक्टर पांडा कहते हैं कि इतने दिनों तक असर रहता है कि अगर वायरस अपना स्वरूप बदलता भी है संक्रमण होने की संभावना हो तो भी वैक्सीन कारगर होती है। वैक्सीन को बनाने में इसी रिसर्च पर सबसे ज्यादा काम करना पड़ता है।

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