तीन बार पूर्वाभ्यास होने के बाद भी टीकाकरण के पहले दिन काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जहां इंटरनेट की वजह से डाटा अपलोड करने में दिक्कतें आईं। वहीं जिन लोगों के सूची में नाम भी नहीं थे उन्हें भी कोरोना का टीका लग गया। इसके पीछे एक बड़ी वजह थी टीका के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों का आगे नहीं आना।
देश भर में कई जगहों पर सूची में शामिल स्वास्थ्य कर्मचारियों ने टीका लगवाने से इंकार कर दिया जिसके बाद दूसरे कर्मचारियों को मौका दिया गया। इन कर्मचारियों का सूची में पहले से नाम नहीं था। इसके चलते केंद्र सरकार ने शनिवार शाम को सभी राज्यों को पत्र लिख स्वास्थ्य कर्मचारियों की फिर से जानकारी मांगी है जिन्हें कोविन वेबसाइट पर जिला वार अपलोड किया जाएगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई स्वास्थ्य कर्मचारियों के सूची में नाम शामिल नहीं थे। कोविन वेबसाइट पर इन कर्मचारियों का नाम नहीं दिखाई दे रहा था। इसके कारण भी कुछ जगहों पर दिक्कतें हुई हैं। राज्यों की ओर से अपडेट डाटा नहीं मिलने से यह दिक्कतें हुई हैं। उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने टीका नहीं लगवाया तो उनकी जगह पर दूसरे कर्मचारियों को मौका दिया गया। इन कर्मचारियों का पहले से सूची में नाम शामिल नहीं था। अब नए सिरे से डाटा अपडेट करने की जरूरत है।
वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. मनोहर अगनानी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि तकनीकी तौर पर मिलीं खामियों को सुधार लिया गया है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य कर्मचारी को जबरन टीका नहीं दिया जा सकता है। यह पूरी प्रक्रिया वालंटियर आधारित है। दिल्ली में भी कुछ जगहों पर ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।