देश का पूरा स्वास्थ्य विभाग कोरोना वायरस से लड़ने में जुटा है। अस्पतालों के ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर बंद हैं। जिसकी वजह से कैंसर, एचआईवी और बाकी के मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जो मरीज अपने इलाज के लिए लगातार अस्पताल जा रहे थे, लॉकडाउन की वजह से वो अब नहीं जा पा रहे हैं।
किसी की सर्जरी अटकी पड़ी है, तो किसी की जांच नहीं हो पा रही है। सभी मेडिकल स्टॉफ कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज में जुटे हैं। जिसकी वजह से अस्पतालों का नियमित कर्य प्रभावित है और इसकी मार बाकी के मरीजों को झेलनी पड़ रही है।
जब देश में लॉकडाउन का एलान हुआ तब कई मरीजों का इलाज चल रहा था। मैत्री उनमें से एक हैं। मैत्री का दिल्ली के एम्स अस्पताल में ओरल कैंसर का इलाज चल रहा था। 13 मार्च को उनसे कहा गया कि आपको तुंरत सर्जरी करवानी पड़ेगी, लेकिन उस समय नहीं हो पाई। अब एम्स की ओपीडी बंद है। डॉक्टर सर्जरी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि वो कोविड-19 के संक्रमितों के इलाज में व्यस्त हैं।
सर्जरी नहीं होने के कारण मैत्री को काफी दर्द का सामना करना पड़ रहा है। उनकी जीभ पर अल्सर से खून बहने लगा है। उन्होंने कहा कि वो हर दिन एम्स अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड में जाती हैं, लेकिन सब कुछ बंद होने के कारण वहां से मुझे पेन किलर पकड़ाकर लौटा दिया जाता है। मैत्री के पति ने कहा कि वहां मौजूद लोग कह रहे हैं कि सरकार के आदेश के बिना कुछ भी शुरू नहीं हो पाएगा। सरकार ने हीं सभी सेवाओं को बंद करने का आदेश दिया है।
दवाईयों का डोज हो रहा मिस
कैंसर के मरीजों की मदद करने वाली संस्था कैनसपोर्ट से जुड़े राजविंदर कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण उनकी टीम मरीजों तक नहीं पहुंच पा रही है। कीमोथेरेपी भी बंद है। हालांकि सफदरजंग अस्पताल में सेवाएं जारी हैं, लेकिन ज्यादातर लोग जिन्हें कीमोथेरेपी की आवश्यकता होती है, वे वहां पहुंचने में असमर्थ हैं।
मुंबई में एचआईवी के मरीज और हमसफर ट्रस्ट के कार्यकर्ता गणेश आचार्य ने कहा कि एचआईवी के रोगी अपने स्थानीय एआरटी केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जो लोग दूसरी और तीसरी लाइन की दवाओं पर हैं, उन्हें और भी अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ये दवाएं केवल बड़े अस्पतालों में ही उपलब्ध हैं। उनकी दवाई मिस हो रही हैं। जो उनके लिए काफी नुकासनदेह साबित होंगी।
कोरोवा के कारण देश के बाकी मरीजों के इलाज बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। कई लोगों की हालत गंभीर है, लेकिन देश में सीमित स्वास्थ्य सुविधा होने के कारण इन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।