बिहार विधानसभा के चुनाव होने में लगभग छह महीने का समय शेष रह गया है, इसके बाद भी जमीन पर चुनावी हलचल कहीं नजर नहीं आ रही है। लेकिन सोशल मीडिया पर चुनावी आहट महसूस की जाने लगी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या राहुल गांधी, जनता के मुद्दे उठाने के लिए सभी नेताओं ने सोशल मीडिया का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। उनकी बातों ने जनता के बीच खूब असर दिखाया है और उन पर तीव्र प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है। इससे कार्यकर्ता भी उत्साहित हैं।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने अमर उजाला से कहा कि कोरोना के कारण वे जमीन पर जाकर लोगों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन इसी बीच वे सोशल मीडिया के माध्यम से अपने कार्यकर्ताओं से जुड़ पा रहे हैं।
वे उन्हें लगातार लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सोशल मीडिया राजनीति में ज्यादा बड़ी और अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
भारतीय जनता पार्टी के एक सदस्य ने कहा कि भारत में पंचायत चुनाव हो या लोकसभा का, इसमें भारी धन खर्च होता है, लेकिन सोशल मीडिया जैसे माध्यमों के बढ़ते चलन के कारण इसमें काफी गिरावट आएगी। चुनाव प्रचार में अन्य माध्यमों की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों और सोशल मीडिया पर खर्च बढ़ेगा।
वहीं, बारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवायएम) के नेता रोहित सिंह कहते हैं कि पारंपरिक चुनावों में देश की सबसे गरीब जनता की आवाज भी सुनाई पड़ती थी। नेता लोगों से सीधा संपर्क करते थे, लेकिन कोरोना काल में यह संभव है कि इस वर्ग तक ज्यादा लोगों की पहुंच न हो पाए।
वे कहते हैं कि देश में आज भी स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत कम है, इसलिए सोशल मीडिया जनता की एकमात्र आवाज नहीं बन सकता। दूसरे, सोशल मीडिया में भारी मात्रा में भ्रामक जानकारी भी साझा कर दी जाती है।