अपराध की घटनाओं में
लॉक डाउन लागू होने से पहले तक इस साल अपराध की 1388 घटनाएं घट चुकी थीं। जबकि गत वर्ष इसी अवधि के दौरान अपराध की 1122 घटनाएं घटीं थीं। इस प्रकार इस वर्ष अपराध की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि लॉक डाउन के लग जाने के कारण अपराध की घटनाओं में काफी कमी हुई। लॉक डाउन की अवधि में भी इस वर्ष अपराध की 819 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि गत वर्ष इसी अवधि के दौरान 1743 घटनाएं घटी थीं।
पूरे अपराध में कोई कमी नहीं
लेकिन जब कुल अपराध के आंकड़ों को समग्र दृष्टि से देखते हैं तो अपराध की घटनाओं पर कोई बड़ा असर पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है। अगर 15 जून तक हुए अपराध के आंकड़ों पर नजर डालें तो अपराध की घटनाओं में कोई कमी होती नजर नहीं आती।
इस वर्ष 15 जून तक अपराध की कुल 2436 घटनाएं घट चुकीं थीं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 2495 घटनाएं घटी थीं। इस प्रकार से देखें तो कुल अपराध की घटनाएं लगभग उसी तरह हो रही हैं जितना कि पिछले वर्षों में होती आई हैं। यहां यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि वर्ष 2019 में दिल्ली में अपराध की कुल 5185 घटनाएं घटी थीं। अगर इस हिसाब से भी देखें तो इस वर्ष 15 जून तक ही अपराध की घटनाएं पिछले वर्ष की तर्ज पर ही आगे बढ़ रही हैं।
स्मार्ट फोन बना पहली पसंद
अपराध में घटी कुल घटनाओं में सबसे ज्यादा (50 फीसदी से अधिक) वारदातें स्मार्ट फोन की चोरी से जुड़ी थीं। माना जा रहा है कि चोरी हुए स्मार्ट फोन को आसानी से दूसरे बाज़ारों में खपा देने की क्षमता के कारण इस तरह के अपराध में बढ़ोतरी हुई है। चोरी हुए स्मार्ट फोन की बरामदगी भी न के बराबर होती है जबकि इन्हें बेचकर नशेड़ी अपराधी अपने लिए पैसों का जुगाड़ कर लेते हैं। इस तरह की वारदातों के बढ़ने के पीछे यह कारण हो सकता है।