अस्पतालों में जगह नहीं
लेकिन इसी जिले के मडियाहूं के विजयी कोइरी का कहना है कि अस्पतालों में कहीं कोई जगह नहीं है। अपने भाई अजय कोइरी के इलाज के लिए वे अस्पताल-दर-अस्पताल भटक चुके हैं, लेकिन उन्हें कहीं भी भर्ती नहीं किया गया। अब वे घर पर ही रहकर क्षेत्र के ही एक डॉक्टर से इलाज करवा रहे हैं।
पूर्वांचल में प्रयागराज का क्षेत्र स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में काफी समृद्ध है। आसपास के क्षेत्रों के लोग इलाज की सुविधाएं लेने के लिए यहां आते हैं। लेकिन इस समय जिले की पूरी व्यवस्था चरमराई हुई है और कोरोना मरीजों की भर्ती के लिए भी लोगों को जगह नहीं मिल पा रही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत कर रहे अधिवक्ता दिलीप शर्मा अपने एक रिश्तेदार को कोरोना के इलाज के लिए कई अस्पतालों का चक्कर काट चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें किसी अस्पताल में जगह नहीं मिल पाई है। दिलीप शर्मा के अनुसार वे अब भी अपने रिश्तेदार का इलाज प्राइवेट स्तर पर एक डॉक्टर की सलाह पर अपने घर पर ही करा रहे हैं। लेकिन वे भी नहीं जानते हैं कि अगर इस दौरान मरीज की स्थिति बिगडती है, उसे ऑक्सीजन जैसी जरूरत पड़ती है तो वे मरीज को लेकर कहां जाएंगे।
पूर्वांचल के एक बेहद महत्वपूर्ण जिले के एक सीएमओ लेवल के अधिकारी का कहना है कि उन पर सभी मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने का भारी दबाव है। प्रशासन के उच्च स्तर से हर तरह के सहयोग की बात कही जा रही है और टेस्टिंग किट्स, दवाएं और अन्य सामान उन तक पहुंचाए जा रहे हैं। लेकिन मरीजों की भारी संख्या को देखते हुए ये बिलकुल भी पर्याप्त नहीं हैं।
अधिकारी ने बताया कि वे उन चंद मरीजों तक ही इलाज उपलब्ध करवा पा रहे हैं जो जिला मुख्यालय के अस्पतालों तक पहुंच पाते हैं। जबकि उन्हें भी इस सच्चाई का ज्ञान है कि जिले के ही ग्रामीण क्षेत्रों की हालत बहुत खराब है और वहां के मरीज इस समय अस्पताल तक पहुंच भी नहीं पा रहे हैं।
झोलाछाप डॉक्टरों के सहारे कोरोना मरीज
ग्रामीण क्षेत्रों में 40-50 किलोमीटर दूर जाने पर जिलों या इसी स्तर के प्रमुख बाज़ारों में ही कोरोना टेस्टिंग की सुविधाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीण इलाकों के मरीज इन जगहों तक पहुंच भी नहीं पा रहे हैं। खांसी-जुकाम या बुखार जैसे लक्षण दिखने पर वे स्थानीय डॉक्टरों के भरोसे हैं। जिनमें ज्यादातर कोरोना जैसी महामारी से लड़ने के लिए दक्ष नहीं हैं। वे मरीज की किसी भी संभावित बीमारी को केवल खांसी-बुखार के नजरिये से देखकर दवा दे रहे हैं। ऐसे में किसी मरीज को कोरोना का कोई इलाज नहीं मिल पा रहा है।
अचानक मौतों की वजह तक नहीं पता चलती
ग्रामीणों में कोरोना को लेकर खौफ बढ़ता जा रहा है। कई स्थानीय लोग अचानक बीमार पड़े और इसके पहले कि परिवार उन तक इलाज की कोई सुविधा उपलब्ध करा पाता, उनकी मौत हो गई। ऐसे में यह कहना बड़ा ही मुश्किल है कि किसी मरीज की मौत किस कारण से हुई है। लेकिन हालत यह हो गई है कि किसी मरीज की मौत के बाद लोग उसे कंधा देने तक के लिए नहीं पहुंच रहे हैं।
जांच करने से भी डर रहे
जिलों में सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि अनेक जगहों पर टेस्टिंग सुविधा नहीं है तो अनेक जगहों पर टेस्टिंग सुविधा होने के बाद भी लोग टेस्टिंग कराने से भी डर रहे हैं। कोरोना के कारण हो रही मौतों के कारण इसके प्रति लोगों का भय बढ़ रहा है। स्वास्थ्यकर्मी भी इससे अछूते नहीं हैं। वे मरीजों के नमूने लेने से भी डर रहे हैं।
इन राज्यों का भी यही हाल
यह हाल केवल उत्तर प्रदेश का नहीं है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा के ग्रामीण क्षेत्रों की भी स्थिति यही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य का पूरा ढांचा केवल प्राइमरी हेल्थ सेंटरों तक सीमित है। इनमें सामान्य जांच की सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। अनेक हेल्थ सेंटरों पर स्वास्थ्यकर्मी भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना की हालत गंभीर होती जा रही है। संक्रमण लगातार बढ़ रहा है लेकिन इसे रोकने के कोई उपाय नहीं हैं।