सीमा सुरक्षा बल के डीजी (अतिरिक्त कार्यभार) एसएस देसवाल, कोरोना के मामलों को लेकर एक्शन मोड में आ गए हैं। उन्होंने आदेश जारी किया है कि बीएसएफ के किसी भी कंपोजिट अस्पताल में अगर जवान, उसके परिजन या पूर्व कर्मी को भर्ती करने से मना किया तो संबंधित मेडिकल अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
इसके अलावा यदि किसी पीड़ित को अपने यहां न रखकर उसे निकटवर्ती सिविल अस्पताल के लिए रेफर किया तो भी अस्पताल को विस्तृत स्पष्टीकरण देना पड़ेगा। साथ ही इस मामले में मेडिकल सुपरीटेंडेंट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का मार्ग खुला रखा जाएगा।
सूत्र बताते हैं कि बीएसएफ में ऐसी शिकायतें मिल रही थी कि कंपोजिट अस्पताल में कोरोना संक्रमण वाले जवानों, उनके परिजनों या पूर्व कर्मियों के इलाज में टालमटोल किया जा रहा है। बीएसएफ मुख्यालय कहता है कि हमारे सभी कंपोजिट अस्पताल कोरोना से निपटने में सक्षम हैं।
वहां पर सभी तरह की सुविधाएं हैं। ऐसे में अगर कोई अस्पताल इलाज के लिए मना करता है या मरीज को सिविल अस्पताल में रेफर करता है तो उस स्थिति में मेडिकल सुपरीटेंडेंट को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
बीएसएफ में कोविड-19 से संक्रमित जवानों की संख्या 100 है। अभी तक 435 जवान और अधिकारी ठीक हो चुके हैं। तीन कर्मियों की मौत हो गई है। मंगलवार को आरक्षक विनोद कुमार प्रसाद ने नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली। विनोद कुमार को दिल्ली पुलिस के साथ लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी में तैनात किया गया था।
कमजोरी और खांसी की शिकायत के चलते उन्हें पांच जून को एम्स में भर्ती कराया गया। छह जून को हुए कोविड-19 परीक्षण की रिपोर्ट नकारात्मक रही थी, लेकिन 8 जून को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। जब दोबारा से जांच हुई तो उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई।
आरक्षक विनोद कुमार प्रसाद के परिवार में माता-पिता, पत्नी और बेटा है। महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल सहित बल के समस्त प्रहरियों ने विनोद कुमार प्रसाद के असामयिक निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।