तीसरी लहर में वयस्कों की तरह बच्चों को भी बराबर का खतरा हो सकता है। पहली बार यह चिकित्सकीय अध्ययन में साबित हुआ है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर का पहला सीरो सर्वे सामने आया है जिसके अनुसार दिल्ली, यूपी सहित चार राज्यों के नोडल केंद्र से हर दूसरा बच्चा और वयस्क कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की पुष्टि हुई है। जांच के दौरान इनके शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी पाई गई हैं जिसके बारे में इन लोगों को भी जानकारी नहीं थी।
मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित इस अध्ययन में दिल्ली, भुवनेश्वर और गोरखपुर एम्स के अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के लिए कार्यरत टीम भी शामिल थी। दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया सहित देश के जानेमाने विशेषज्ञ भी इस अध्ययन में शामिल हैं।
अध्ययन के अनुसार कोरोना महामारी की दूसरी लहर में संक्रमण गांव-गांव तक पहुंचा है। तीसरी लहर को लेकर काफी चिंता जताई जा रही है कि इससे बच्चों को खतरा हो सकता है। इसीलिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, अगरतला, चंडीगढ़, पुडुचेरी, ओडिशा, केरल, दादरा नागर हवेली, मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 10 हजार लोगों के रक्त नमूने लिए गए। इन राज्यों के आसपास छह चिकित्सीय संस्थानों को नोडल केंद्र बनाया गया था जहां नमूने आने के बाद जांच और फिर अध्ययन किया गया।
दो चरणों में हुआ अध्ययन
दो चरण में हो रहे इस अध्ययन में फिलहाल 10 हजार में से 4509 लोगों के परिणाम सामने आ चुके हैं। 15 मार्च से 10 जून तक चले इस अध्ययन में 2 से 17 वर्ष के 700 बच्चों को शामिल किया गया। जबकि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के 3809 लोगों की जांच की गई।
जांच में पता चला है कि 2 से 17 वर्ष की आयु के 55.7 फीसदी बच्चे कोरोना की चपेट में आए हैं। जबकि 18 वर्ष से अधिक आयु के 63.5 फीसदी वयस्क संक्रमित हुए। इस दौरान यह पता चला है कि बच्चों और व्यस्कों में महामारी का खतरा अलग अलग नहीं है। भविष्य में अगर कोई तीसरी लहर आती है तो 2 से 17 साल के बच्चों को ज्यादा खतरा होने की कल्पना नहीं की जा सकती।
शहरी बच्चे ज्यादा हुए कोरोना संक्रमित
अध्ययन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी बच्चे अधिक संख्या में संक्रमित हुए हैं। 700 में से 92 बच्चे शहरी क्षेत्र से लिए गए थे जिनमें 73.9 फीसदी (68) संक्रमित पाए गए। जबकि ग्रामीण क्षेत्र के 608 बच्चों की जांच में 52.9 फीसदी (322) संक्रमित मिले।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र में सर्वाधिक 80.6 फीसदी संक्रमित मिले हैं। यहां 108 में से 87 बच्चों में एंटीबॉडी मिली हैं। जबकि अगरतला में 30.8 फीसदी (146 में से 45) बच्चे संक्रमित मिले।
ठीक इसी तरह भुवनेश्वर में 45.4 फीसदी (165 में से 75) बच्चे कोरोना की चपेट में आए। दिल्ली-एनसीआर के बल्लभगढ़ गांव के आसपास 61.4 फीसदी बच्चे कोरोना की चपेट में आए। यहां 189 में से 116 बच्चों में एंटीबॉडी मिले हैं।