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कोरोना वायरस : दिल्ली, यूपी सहित चार राज्यों में हर दूसरा बच्चे और वयस्क में मिलीं एंटीबॉडी

Fri, 18 Jun 2021 03:33 AM IST
Jeet Kumar परीक्षित निर्भय , नई दिल्ली।

सार

  • कोरोना की दूसरी लहर का पहला सीरो सर्वे आया सामने, वयस्कों की तरह बच्चे भी खतरे में
  • दिल्ली, भुवनेश्वर और गोरखपुर एम्स सहित छह राष्ट्रीय संस्थानों ने मिलकर किया सर्वे
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फाइल फोटो - फोटो : PTI
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विस्तार
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तीसरी लहर में वयस्कों की तरह बच्चों को भी बराबर का खतरा हो सकता है। पहली बार यह चिकित्सकीय अध्ययन में साबित हुआ है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर का पहला सीरो सर्वे सामने आया है जिसके अनुसार दिल्ली, यूपी सहित चार राज्यों  के नोडल केंद्र से हर दूसरा बच्चा और वयस्क कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की पुष्टि हुई है। जांच के दौरान इनके शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी पाई गई हैं जिसके बारे में इन लोगों को भी जानकारी नहीं थी।

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मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित इस अध्ययन में दिल्ली, भुवनेश्वर और गोरखपुर एम्स के अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के लिए कार्यरत टीम भी शामिल थी। दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया सहित देश के जानेमाने विशेषज्ञ भी इस अध्ययन में शामिल हैं।

अध्ययन के अनुसार कोरोना महामारी की दूसरी लहर में संक्रमण गांव-गांव तक पहुंचा है। तीसरी लहर को लेकर काफी चिंता जताई जा रही है कि इससे बच्चों को खतरा हो सकता है। इसीलिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, अगरतला, चंडीगढ़, पुडुचेरी, ओडिशा, केरल, दादरा नागर हवेली, मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 10 हजार लोगों के रक्त नमूने लिए गए। इन राज्यों के आसपास छह चिकित्सीय संस्थानों को नोडल केंद्र बनाया गया था जहां नमूने आने के बाद जांच और फिर अध्ययन किया गया।
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दो चरणों में हुआ अध्ययन
दो चरण में हो रहे इस अध्ययन में फिलहाल 10 हजार में से 4509 लोगों के परिणाम सामने आ चुके हैं। 15 मार्च से 10 जून तक चले इस अध्ययन में 2 से 17 वर्ष के 700 बच्चों को शामिल किया गया। जबकि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के 3809 लोगों की जांच की गई।

जांच में पता चला है कि 2 से 17 वर्ष की आयु के 55.7 फीसदी बच्चे कोरोना की चपेट में आए हैं। जबकि 18 वर्ष से अधिक आयु के 63.5 फीसदी वयस्क संक्रमित हुए। इस दौरान यह पता चला है कि बच्चों और व्यस्कों में महामारी का खतरा अलग अलग नहीं है। भविष्य में अगर कोई तीसरी लहर आती है तो 2 से 17 साल के बच्चों को ज्यादा खतरा होने की कल्पना नहीं की जा सकती।

शहरी बच्चे ज्यादा हुए कोरोना संक्रमित
अध्ययन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी बच्चे अधिक संख्या में संक्रमित हुए हैं। 700 में से 92 बच्चे शहरी क्षेत्र से लिए गए थे जिनमें 73.9 फीसदी (68) संक्रमित पाए गए। जबकि ग्रामीण क्षेत्र के 608 बच्चों की जांच में 52.9 फीसदी (322) संक्रमित मिले।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र में सर्वाधिक 80.6 फीसदी संक्रमित मिले हैं। यहां 108 में से 87 बच्चों में एंटीबॉडी मिली हैं। जबकि अगरतला में 30.8 फीसदी (146 में से 45) बच्चे संक्रमित मिले।

ठीक इसी तरह भुवनेश्वर में 45.4 फीसदी (165 में से 75) बच्चे कोरोना की चपेट में आए। दिल्ली-एनसीआर के बल्लभगढ़ गांव के आसपास 61.4 फीसदी बच्चे कोरोना की चपेट में आए। यहां 189 में से 116 बच्चों में एंटीबॉडी मिले हैं।

बेटियों को ज्यादा हुआ कोरोना, ज्यादातर में लक्षण

सीरो सर्वे में एक और तथ्य सामने आया है कि 2 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों में बेटियां सबसे ज्यादा संक्रमित हुई हैं। 700 में से 338 बच्चियां थीं जिनमें से 198 (58.6 फीसदी) संक्रमित मिली हैं। जबकि लड़कों में 53 फीसदी संक्रमित मिले।

सरकार दूसरी लहर में भी 80 फीसदी बिना लक्षण वाले मरीजों का दावा कर रही थी लेकिन इस सर्वे में पता चला है कि बच्चों में यह तथ्य गलत है क्योंकि 68.7 फीसदी संक्रमित बच्चों में लक्षण मिले हैं।

52.7 फीसदी बच्चे ऐसे थे जिनमें लक्षण नहीं थे लेकिन उनके शरीर में एंटीबॉडी मौजूद थीं। 67.2 फीसदी में बुखार, 57.9 फीसदी में सांस लेने में तकलीफ, गले में दर्द इत्यादि के लक्षण थे और 60 फीसदी में पेट दर्द एवं 75 फीसदी में स्वाद और गंध न आने के लक्षण थे।

इन छह केंद्रों पर राज्यों से पहुंचे सैंपल

केंद्र                                                                                      राज्य

दिल्ली एम्स                                                                          दिल्ली और चंडीगढ़
भुवनेश्वर एम्स                                                                      ओडिशा
गोरखपुर एम्स                                                                       उत्तर प्रदेश
पीजीआईएमईआर पुडुचेरी                                                        पुडुचेरी, केरल, गोवा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश
अगरतला मेडिकल कॉलेज                                                        सिक्किम, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा
ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट फरीदाबाद        बल्लभगढ़ गांव

फैक्ट फाइल 
  • 2 से 17 साल के 700 में से 362 लड़के थे जिनमें 192 यानी 53 फीसदी संक्रमित मिले।
  • 338 लड़कियों में 198 यानी 58.6 फीसदी संक्रमित मिलीं।
  • 1से 4 साल के 33 में से 14 यानी 42.4 फीसदी, 5 से 9 साल के 153 में से 67 (43.8 फीसदी) और 10 से 17 साल के 512 में से 309 (60.3फीसदी) बच्चे संक्रमित मिले।
  • 131 में से 90 यानि 68.7 फीसदी में कोरोना के लक्षण थे। जबकि अन्य 569 में से 300 (52.7 फीसदी) संक्रमित में लक्षण नहीं थे।

संक्रमित बच्चों में सबसे ज्यादा मिलने वाले लक्षण
  • 67 में से 45 संक्रमित बच्चों में बुखार का लक्षण मिला।
  • 67 में से 44 संक्रमित बच्चों में श्वसन लक्षण मिले।
  • 15 में से 10 संक्रमित बच्चों में पेट के लक्षण (उल्टी, जी मिचलाना और दस्त) मिले।
  • चार में से तीन संक्रमित बच्चों में गंध और स्वाद न आने का लक्षण मिला।
वयस्कों में यह रही स्थिति
  • शहरी क्षेत्र के 909 में से 680 यानी 74.8 फीसदी वयस्क संक्रमित मिले।
  • ग्रामीण क्षेत्र के 2900 में से 1741 यानी 60 फीसदी वयस्क संक्रमित मिले।

मुंबई में दो दिन में बढ़े  50 फीसदी मामले

महाराष्ट्र सरकार कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी में जुटी है, जबकि दूसरी लहर में ही फिर से बढ़ रहे संक्रमण ने चिंता बढ़ा दी है। बीते दो दिनों में मुंबई में कोरोना मरीजों की संख्या में करीब 50 फीसदी मामले बढ़ गए हैं।

मुंबई में 14 जून को 530 और 15 जून को 572 कोरोना के नए मरीज सामने आए थे, लेकिन 16 जून के बाद संक्रमितों के आंकड़े बढ़ने लगे। मंगलवार को मुंबई में 821 नए कोरोना के मरीज सामने आए। मुंबई में बीते 11 दिनों में रोजाना मिलने वाले नए कोरोना मरीजों में यह सर्वाधिक आंकड़ा है। महाराष्ट्र के 6 जिलों में कोरोना की स्थिति अब भी चिंताजनक है।

महाराष्ट्र के 6 जिलों में कोरोना की स्थिति चिंताजनक
वैश्विक कोरोना महामारी से उबर रहे महाराष्ट्र में एक बार फिर संक्त्रस्मण बढ़ा है। सूबे के 6 जिलों में कोरोना संक्त्रस्मण अभी चिंताजनक बना हुआ है। इस बीच बीते दो दिनों में मुंबई में भी कोरोना मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। एक तरफ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी में लगे हैं। वहीं, दूसरी तरफ कोरोना संक्त्रस्मितों की संख्या में बृद्धि का आंकड़ा हैरान करने वाला है।

मुंबई में बीते 14 जून को 530 और 15 जून को 572 कोरोना के नए मरीज सामने आए थे। इन दो दिनों में मृतकों का आंकड़ा क्त्रस्मश:19 और 14 था। लेकिन 16 जून के बाद कोरोना संक्त्रस्मित मरीजों के आंकड़े बढ़ने लगे। मंगलवार को मुंबई में 821 नए कोरोना के मरीज सामने आए।

मुंबई में बीते 11 दिनों में रोजाना मिलने वाले नए कोरोना मरिजों में यह सर्वाधिक आंकड़ा है। इसी तरह महाराष्ट्र में भी 14 और 15 जून को मरीजों की संख्या 10 हजार से कम थी। लेकिन बुधवार को यह संख्या 10,107 हो गई और 337 मरीजों की मौत हुई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अधिकारियों का कहना है कि शहर में गंभीर मरीजों की संख्या कम होने के साथ ही आंकड़े भी कम होंगे।

लेकिन अच्छी बात यह है कि राज्य में रिकवरी दर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को सूबे में 10,576 मरीज स्वस्थ हुए जिससे रिकवरी दर 96 फीसदी हो गया है। सूबे में 1.3 लाख कोरोना के सक्त्रिस्य मामले हैं जबकि मुंबई में 17,782 मरीजों का इलाज चल रहा है।
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कोरोना की दूसरी लहर में 60 हजार से अधिक की मौत

महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर ने जमकर कहर बरपाया है। सूबे में आई दूसरी लहर में 60 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। राज्य में अब तक कोरोना महामारी से 1,14154 मरीजों की मौत हुई है जिसमें से सर्वाधिक मौतें दूसरी लहर में हुई है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पहली लहर में 2,48,802 लोग कोरोना वायरस की चपेट में आए थे जिसमें से 51,360 मरीजों की मौत हुई थी। आंकड़ों के अनुसार देश में अब तक कोरोना से 3.4 लाख लोगों की मौत हुई है जिसमें से 20 फीसदी से अधिक मौते केवल महाराष्ट्र में हुई हैं।
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