केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जिस वैरीयंट 'एरिस' को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जताई है उसको लेकर देश में स्वास्थ्य एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है। बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर समेत कोविड मामलों पर नजर रखने वाली कमेटी के अधिकारियों की बैठक भी हुई है।
बैठक में शामिल अधिकारियों ने बताया कि जो मामला मई में भारत में आया है उसको लेकर जीनोम सीक्वेंसिंग की जा चुकी है। उसमें पता चला है कि यह वेरिएंट ओमिक्रोन वेरिएंट का ही बदला हुआ एक स्वरूप है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह वेरिएंट फिलहाल बड़े खतरे की तरह नहीं है। बावजूद इसके सभी जरूरी उपाय और तैयारियां की जा चुकी हैं।
केंद्र सरकार की ओर से कोविड मामले को लेकर बनाई गई कमेटी के डॉ. एनके अरोड़ा ने बताया कि उनकी टीम और इस मामले पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ लगातार मॉनीटरिंग कर रहे हैं। पुणे नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी से जुड़े एक वरिष्ठ वैज्ञानिक बताते हैं कि फिलहाल वायरस के म्यूटेशन और उसके फैलने की आशंकाओं को लेकर जो तैयारी की जानी चाहिए वह की जा चुकी हैं। उनकी लैब से इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि जिस व्यक्ति में मई के महीने में बदले स्वरूप वाला वायरस मिला था उसके संपर्क में आए हुए किसी भी व्यक्ति को संक्रमण नहीं हुआ है। वो कहते हैं कि इससे इस बात की पुष्टि होती है कि वायरस का बदला हुआ स्वरूप उतना मारक नहीं है। बावजूद इसके आईसीएमआर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार इस मामले में मॉनिटरिंग कर रहा है।
देश के पूर्व मुख्य महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर समीरन पांडा कहते हैं कि इस तरीके के बदले हुए स्वरूप अब लगातार आते रहेंगे। उनका कहना है कि हर बदले हुए स्वरूप की अपनी अलग-अलग क्षमताएं होगी। कोई बदला हुआ स्वरूप किसी को संक्रमित कर सकता है तो कोई बदला हुआ शुरू किसी स्तर पर जानलेवा भी हो सकता है।
डॉक्टर पांडा का मानना है कि एक बार वायरस की मौजूदगी अगर हो गई है तो उसकी पूरी तरीके से बिल्कुल खत्म नहीं किया जा सकता है। वह कहते हैं कि धीरे-धीरे ही सही लेकिन एक वायरस अपना एक समय के अंतराल पर अपना स्वरूप बदलता ही रहेगा। वह सलाह देते हैं कि अभी भी लोग अगर मास्क पहनकर भीड़भाड़ वाली जगह पर जाएं या किसी ऐसी जगह पर जहां पर संक्रमण का खतरा हो तो बचाव किया जा सकता है। कहते हैं कि मस्क से सिर्फ कोविड ही नहीं रुकता है बल्कि अन्य तरीके का संक्रमण भी बचाया जा सकता है।