कोलंबिया के कैली में 16वें संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (कॉप-16) में भारत ने अमीर देशों से आग्रह किया कि वे गरीब देशों को उनकी जैव विविधता के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करने के लिए तेजी से फंड, तकनीक और संसाधन प्रदान करें। सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने अपडेटेड राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (एनबीएसएपी) लॉन्च की।
उन्होंने कहा कि एनबीएसएपी वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों, खास तौर से कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (केएमजीबीएफ) के मुताबिक है। केएमजीबीएफ उद्देश्य 2030 तक जैव विविधता हानि को रोकना और इसे पहले जैसा करना है। मंत्री सिंह ने कहा कि एनबीएसएपी यानी भारत की जैव विविधता योजनाओं को लागू करने के लिए वित्तीय सहायता, तकनीक और संसाधनों का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत वसुधैव कुटुंबकम यानी एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य की भावना का समर्थन करता है।
पीएम मोदी की पहल एक पेड़ मां के नाम जैव विविधता को समर्पित
मंत्री ने कहा कि लंबे वक्त से प्रकृति का सम्मान और उसकी सुरक्षा करने की भारत में लंबी परंपरा रही है। हमारे प्रधानमंत्री ने जैव विविधता को बहाल करने और उसकी रक्षा करने के अपनी माताओं की तरह ही धरती माता का सम्मान करने के लिए हमारे सामूहिक प्रयासों के हिस्से के रूप में विश्व पर्यावरण दिवस पर एक पेड़ मां के नाम एक राष्ट्रव्यापी पौधरोपण अभियान शुरू किया।
विकसित देशों की अधिक जिम्मेदारी
भारत ने जोर दिया कि जैव विविधता लक्ष्यों को हासिल करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से विकासशील देशों पर नहीं होनी चाहिए। इसके लिए अमीर देशों को संरक्षण प्रयासों और वित्तीय सहायता में अधिक भूमिका निभानी चाहिए। सम्मेलन में लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा के साथ आनुवांशिक संसाधनों की डिजिटल जानकारी पर चर्चा की जाएगी।
हमारी नमामि गंगे मिशन जैसी कई कोशिशें हैं जारी
उन्होंने कहा कि भारत ने स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की शुरू की है। इसका उद्देश्य दुनिया की सात प्रमुख बिग कैट प्रजातियों की रक्षा करना है। सिंह ने कहा कि पवित्र गंगा नदी को पुनर्जीवित करने के लिए देश के नमामि गंगे मिशन को संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया के शीर्ष 10 पारिस्थितिकी तंत्र बहाली कोशिशों में से एक बताया था। उन्होंने कहा कि देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त वेटलैंड्स (रामसर साइट) की संख्या 2014 से 26 से बढ़कर 85 हो गई है और यह संख्या जल्द ही 100 तक पहुंच जाएगी।