फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gujarat High Court: 'धर्मांतरण पीड़ितों पर भी हो सकती है कार्रवाई, अगर वे...' गुजरात हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Thu, 09 Oct 2025 02:07 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

गुजरात हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि धर्मांतरण पीड़ितों पर भी कार्रवाई हो सकती है अगर वे दूसरों पर धर्म बदलने के लिए दबाव डालते हैं। इसमें कुल 16 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से कुछ ने एफआईआर रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि एफआईआर और गवाहों के बयानों में आरोप साफ दिखाई देते हैं।
विज्ञापन
गुजरात हाईकोर्ट - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति खुद को धर्म परिवर्तन का 'पीड़ित' बताता है, लेकिन बाद में दूसरों को धर्म बदलने के लिए दबाव डालता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। जस्टिस नीरजर देसाई की अदालत ने 1 अक्तूबर को यह टिप्पणी करते हुए कुछ याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति दूसरों पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालता है या लालच देता है, तो वह भी अपराध की श्रेणी में आता है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - ISIS Module Probe: पुणे में ISIS मॉड्यूल केस को लेकर एटीएस की बड़ी कार्रवाई, 19 संदिग्धों के ठिकानों पर छापा

पीड़ितों ने दूसरों पर डाला धर्म परिवर्तन का दबाव
याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि वे मूल रूप से हिंदू थे और दूसरों के दबाव में आकर इस्लाम में धर्मांतरित हुए। इसलिए वे खुद पीड़ित हैं, आरोपी नहीं। लेकिन अदालत ने पाया कि उन्होंने ही आगे चलकर दूसरों को धर्म बदलने के लिए प्रभावित किया और उन पर दबाव डाला।
विज्ञापन


क्या है पूरा मामला?
मामला भरूच जिले के आमोद पुलिस थाने का है। एफआईआर में आरोप है कि तीन लोगों ने करीब 37 हिंदू परिवारों के 100 से ज्यादा लोगों को लालच देकर इस्लाम में धर्मांतरित किया। जब एक व्यक्ति ने इसका विरोध किया तो उसे धमकाया गया, जिसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - WB: खगेन मुर्मू पर हमले की NIA जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका; BJP बोली- ममता की उल्टी गिनती शुरू

एक विदेशी नागरिक पर फंडिंग करने का आरोप
इसके अलावा, एक विदेशी नागरिक पर भी धर्म परिवर्तन के लिए फंडिंग करने का आरोप है। अदालत ने उसके मामले में भी राहत देने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि वह कई बार भारत आ चुका है और जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 120B (षड्यंत्र), 153ब (समुदायों में वैमनस्य फैलाना) और 295A (धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले कृत्य) के तहत दर्ज किया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें