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डालमिया के लालकिला गोद लेने पर मचा बवाल, कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जताया एतराज

Sat, 28 Apr 2018 05:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत के वैभव और शौर्य की निशानी लालकिला को डालमिया कंपनी को सौंपे जाने पर खासा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस समेत कई दलों ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है। कांग्रेस ने इस फैसले को लेकर सरकार पर बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस पार्टी ने ट्वीट कर पूछा कि 'बीजेपी सरकार अब किस प्रतिष्ठित स्थल को प्राइवेट कंपनी के हवाले करेगी?'

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बीजेपी की परंपरागत सहयोगी रही शिवसेना ने भी मोदी सरकार के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। शिव सेना नेता मनीषा कायंडे ने कहा कि ये बहुत शर्मनाक बात है कि हम अपने ही धरोहरों का रखरखाव नहीं कर सकते हैं। उधर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, 'मोदी सरकार द्वारा इसे लाल किले का निजीकरण करना कहोगे, गिरवी रखना कहोगे या बेचना।'



 

लालकिला के कॉन्ट्रैक्ट को लेकर डालमिया भारत ग्रुप, टूरिज्म मिनिस्ट्री, आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के बीच बीते 9 अप्रैल को डील हुई। कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक ग्रुप को 6 महीने के भीतर लाल किले में बेसिक सुविधाएं देनी होंगी। एक साल के भीतर इसे टेक्सटाइल मैप, टायलेट अपग्रेडेशन, रास्तो पर लाइटिंग, बैटरी से चलने वाले व्हीकल, चार्जिंग स्टेशन और एक कैफेटेरिया बनाना होगा। 

देश के इस ऐतिहासिक धरोहर को संवारने की खातिर डालमिया ग्रुप ने 25 करोड़ की डील की। इस तरह ये ऐतिहासिक स्मारक गोद में लेने वाला भारत का ये पहला कॉर्पोरेट हाउस बन गया है। जानकारी के मुताबिक डालमिया ग्रुप संभवत: 23 मई से काम भी शुरू करने की प्रक्रिया में जुट जाएगी। इस में यह खाका तैयार होगा कि कैसे लाल किले का विकास हो। हालांकि 15 अगस्त के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से पहले जुलाई में डालमिया ग्रुप को लालकिला फिर से सिक्योरिटी एजेंसियों को देना होगा। इसके बाद ग्रुप एकबार फिर से लाल किले को अपने हाथ में ले लेगा।
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इसके लिए डालमिया ग्रुप टूरिस्ट से पैसे चार्ज कर सकेगा। इसमें पीने के पानी की सुविधा, स्ट्रीट फर्नीचर जैसी सुविधा शामिल हैं। ग्रुप को जितना पैसा मिलेगा उसे वो पैसा फिर से लाल किले के विकास पर ही लगाना होगा। इसके अलावा ग्रुप लाल किले के भीतर अपनी ब्रांडिंग का उपयोग कर सकेगा।
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