सियाम के आंकडों के अनुसार डीजल कारों की बिक्री की मात्रा में 2012 से 2018 के बीच लगभग 27 प्रतिशत की गिरावट आई है। डीजल कारों की कीमत पेट्रोल कारों के मुकाबले एक से डेढ़ लाख रुपये ज्यादा है और अगर वर्ष 2020 तक बीएस-6 एमीशन के नियम लागू होते हैं तो डीजल कारों की कीमतों में इजाफा होगा। यानि आने वाले समय में डीजल कारों के लिए यह संकट और गहराएगा।
कंपनियां कर रही हैं बदलाव
कार निर्माता भी इस संकट से बचने के लिए नए-नए तरीके आजमा रहे हैं। भारत में फार्चूनर व इन्नोवा जैसी डीजल कारों की वजह से चर्चित कार निर्माता टोयोटा ने इस संकट को देखते हुए अपनी अगली सिडान यारिस के सिर्फ पेट्रोल मॉडल को भारत में उतारने का फैसला किया है। लग्जरी कारों के निर्माता जैसे जैगुआर, लैंड रोवर, बीएमडब्लू ने भी इस संकट को भापते हुए अपने उत्पादन में पेट्रोल कारों को भी शामिल कर लिया है।