केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद
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गौरतलब है कि जस्टिस जोसेफ की सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति को लेकर पिछले कुछ समय से सुप्रीम कोर्ट कोलीजियम और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज नियुक्ति के लिए जस्टिस केएम जोसेफ के नाम की सिफारिश वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा के नाम के साथ 10 जनवरी को की थी।
केंद्र सरकार ने मल्होल्त्रा के नाम को स्वीकार कर लिया था और जोसेफ के नाम पर दोबारा विचार करने के लिए वरिष्ठता की उपयुक्तता की कमी का हवाला देते हुए लौटा दिया था। इंदु मल्होत्रा के सुप्रीम कोर्ट में जज की शपथ लेने के बाद कोलेजियम ने 10 मई को सैद्धांतिक तौर पर तय किया कि जस्टिस जोसेफ का नाम दोबारा भेजा जाएगा।
दरअसल उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस जोसेफ ने उस पीठ का नेतृत्व किया था जिसने 2016 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को निरस्त कर दिया था। उत्तराखंड में उस समय कांग्रेस की सरकार थी। केंद्र सरकार के फैसले को पूरे विवाद से जोड़कर देखा जा रहा था।
न्याय विभाग के मुताबिक वरिष्ठता इस बात से तय होती कि किसी व्यक्ति की नियुक्ति बतौर हाईकोर्ट के जज किस दिन हुई, ना कि इससे कि वह हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश कब बना।
महत्वपूर्ण तारीखें
| नाम |
हाईकोर्ट में नियुक्ति |
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने |
सेवानिवृत्ति की तय तारीख |
| इंदिरा बनर्जी |
5 फरवरी, 2002 |
5 अप्रैल, 2017 |
23 सितंबर, 2022 |
| विनीत शरण |
14 फरवरी, 2002 |
26 फरवरी, 2016 |
10 मई, 2022 |
| के एम जोसेफ |
14 अक्टूबर, 2004 |
31 जुलाई, 2014 |
16 जून, 2023 |