आने वाले दिनों में अगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुल या कोई संरचना बनाने में बड़ी खामी मिली तो उसे बनाने वाली कंपनी या संबंधित लोगों को 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना भरना पड़ेगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण (एनएचएआई) ने मंगलवार को कहा कि उसने संरचनाओं में बड़ी खामियों से निपटने के लिए यह सख्त नीति तैयार की है। जुर्माने के अलावा उस कंपनी या दोषी ठेकेदारों को किसी भी एनएचएआई परियोजना के लिए तीन साल तक प्रतिबंधित भी किया जा सकता है।
एनएचएआई ने मानकों में चूक करने वालों के लिए जारी की सख्त नीति
एनएचएआई के इस कदम का मकसद राजमार्गों के विकास में उच्च गुणवत्ता वाले मानकों को बनाए रखना है। एनएचएआई ने बयान जारी कर कहा, राजमार्गों के विकास में खामियों से निपटने के लिए उसने ठेकेदारों द्वारा पुलों या संरचनाओं के ढांचे आदि के निर्माण मानकों में कोई चूक करने पर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए एक सख्त नीति जारी की है।
मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के तहत, ऐसे मामले की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा। जो जांच के बाद उपयुक्त हर्जाना लगाए जाने की सिफारिश करेगी। बीते साल ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि भारत अगले दो साल में सड़क परिवहन में अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों की कतार में आ जाएगा।
हताहत नहीं तो ठेकेदार को एक साल तक की सजा और पांच करोड़ तक का जुर्माना
बड़ी चूकों, बड़ी घटनाओं और बड़ी विफलताओं के चलते कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ जाती है। बड़ी चूक के लिए जहां किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, ऐसी स्थिति में दोषी ठेकेदारों या कंपनी को न केवल काम सुधारना होगा, बल्कि 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी भरना होगा। साथ ही उसे एक साल तक काम करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इससे जुडे़ कर्मियों को दो साल तक के लिए परियोजनाओं में काम करने पर रोक लगा दी जाएगी।
छोटी चूक की स्थिति में 30 लाख रुपये जुर्माना
छोटी चूक की स्थिति में जहां कोई हताहत नहीं है, ऐसे मामलों में ठेकेदारों या कंपनियों को खराब काम को सुधारना होगा और इसके साथ ही 30 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा। इसमें शामिल कंपनी और कर्मियों को लिखित में चेतावनी भी दी जाएगी।
कंसल्टेंसी कंपनी को भी भरना होगा 40 लाख तक का जुर्माना
परियोजना में शामिल किसी कंसल्टेंसी कंपनी को भी चूक की जिम्मेदार माना जाएगा और उसे 40 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ेगा। साथ ही दो साल तक के लिए एनएचएआई की किसी परियोजना से हाथ धोना पड़ सकता है। इस कंसल्टेंसी कंपनी के मुख्य कर्मियों को परियोजना से तीन साल तक के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।