केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल के बंगले में निर्माण कार्य में हुई देरी पर केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के ठेकेदार को बंधक बनाने का मामला सामने आया है। ठेकेदार नरेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया है कि टाइल्स लगाने में देरी के कारण उन्हें घंटों बंधक बनाकर रखा गया। इस मामले में सीपीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजीनियर धर्मेंद्र ने शनिवार देर शाम तिलक मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई लेकिन देर रात तक मामला दर्ज नहीं किया गया। ठेकेदार का आरोप है कि अनुप्रिया पटेल के परिजनों ने उनसे कहा कि जब तक टाइल्स नहीं आ जाएगी, तब तक उन्हें बंधक बना कर रखा जाएगा। हालांकि बाद में उन्हें सीपीडब्ल्यूडी के सहायक इंजीनियर अजमेर सिंह ने छुड़ा लिया।
अजमेर सिंह ने बताया कि किसी भी कारण से काम पूरा होने में देरी हो सकती है। ऐसे में किसी को बंधक बनाया जाना उचित नहीं है। अजमेर सिंह ने बताया कि बंधक बनाए जाने के बाद ठेकेदार ने उन्हें फोन किया था। इसके बाद वे उन्हें तत्काल छुड़ाने पहुंचे। उन्होंने कहा कि हमारी मंत्री से कोई अनबन नहीं है। इसलिए हम इस बात को लेकर पुलिस के पास नहीं जाएंगे। हम सरकारी कर्मचारी हैं, यहां केवल काम करने के लिए आए हैं। ऐसा हमारे साथ पहली बार हुआ है।
वहीं अनुप्रिया पटेल के पति आशीष सिंह ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि मैं इस बंगले का मालिक नहीं हूं। मैं घर के भीतर था। जब बाहर आया तो देखा कि मंत्री के स्टाफ काम में देरी के लिए श्रमिकों को डांट रहे थे। यदि किसी को यह लगता है कि हमने किसी को बंधक बनाया है तो वे हमारे खिलाफ कानूनी कदम उठा सकते हैं।