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सीएपीएफ कैडर अफसरों के अवमानना का केस: सुप्रीम कोर्ट में गृह मंत्रालय का हलफनामा; सुनवाई से पहले मांगा समय

सार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में कैडर अफसरों के हितों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के 23 मई 2025 के आदेश के पालन में देरी पर अवमानना याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई 27 अप्रैल को होनी है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि कैडर रिव्यू प्रक्रिया जटिल और बहुआयामी है, जिसमें डीओपीटी व वित्त मंत्रालय सहित कई विभाग शामिल हैं, इसलिए समय चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में कैडर अफसरों के हितों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 23 मई 2025 को जो ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, उसमें अवमानना का केस दायर किया गया था। केस की सुनवाई 27 अप्रैल को होनी है। अब उससे पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है। इसमें गृह मंत्रालय ने कहा है कि कैडर रिव्यू की प्रक्रिया जारी है। यह एक जटिल प्रक्रिया है। इसमें डीओपीटी सहित कई मंत्रालय शामिल हैं।इसके चलते उक्त मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय से अतिरिक्त समय मांगा है।
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गृह मंत्रालय ने क्या कहा है?
केंद्रीय गृह मंत्रालय में अवर सचिव अमित कुमार की तरफ से 24 अप्रैल को दिए गए हलफनामे में कहा गया है कि वे सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं। इस मामले में जानबूझकर किसी आदेश का उल्लंघन नहीं किया है। कैडर रिव्यू का कार्य जटिल और बहुआयामी है। इसमें कैडर समीक्षा, नियमों में परिवर्तन, समन्वय और वित्तीय प्रभाव आदि शामिल हैं। इस प्रक्रिया को एक दम पूरा नहीं किया जा सकता। डीओपीटी से समन्वय करना है, वित्त मंत्रालय से बातचीत की जाएगी। 

अब तक हुई कार्रवाई का विवरण
गृह मंत्रालय ने 26 दिसम्बर को सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) को पत्र भेजकर एक महीने के भीतर व्यापक कैडर समीक्षा और विस्तृत प्रस्ताव मांगे थे। तीस दिन के भीतर कैडर समीक्षा प्रपोजल मांगा गया था। इस बाबत तीन फरवरी को सीएपीएफ को अनुस्मारक भेजा गया क्योंकि प्रपोजल लंबित थे। सर्वोच्च न्यायालय के ध्यान में होने के कारण यह मामला उच्च प्राथमिकता पर रहा है। इस बीच संसद ने सीएपीएफ में ग्रुप ए अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 पारित कर दिया।
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मामले में देरी का कारण
इस मामले में नीतिगत, वित्तीय और संरचनात्मक बदलाव शामिल हैं, जिनके दीर्घकालिक प्रभाव होंगे। कई मंत्रालयों के साथ प्रत्येक चरण में सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श की आवश्यकता है। इसके चलते गृह मंत्रालय की ओर से उक्त प्रक्रिया को ठीक से पूरा करने के मकसद से अधिक समय मांगने के लिए एक विविध आवेदन (14121/2026) दायर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि उनके निवेदनों को रिकॉर्ड में लें और देरी के कारणों पर विचार करें। इस मामले में याचिकाकर्ता महेंद्र सिंह देव और अन्य हैं, जबकि प्रतिवादी केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और अन्य हैं।

अदालत के आदेश की पृष्ठभूमि
सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील संख्या 13104/2024 में आदेश दिया था कि 2021 से लंबित सभी सीएपीएफ में कैडर समीक्षा 6 महीने के भीतर पूरी की जाए। सरकार द्वारा 2019 में सीएपीएफ को संगठित समूह ए सेवा (ओजीएएस) के रूप में स्वीकार किए जाने के बाद गृह मंत्रालय प्रत्येक सीएपीएफ के सेवा/भर्ती नियमों की समीक्षा करे। समीक्षा के दौरान कैडर अधिकारियों की बात सुनी जाए। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट प्राप्त होने के 3 महीने के भीतर विभाग (डीओपीटी) निर्णय ले। कैडर अफसरों की परमोशन में ठहराव को कम करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड स्तर तक प्रतिनियुक्ति पदों को 2 वर्षों के भीतर धीरे-धीरे कम किया जाए। जब तय अवधि में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमल नहीं किया गया तो पूर्व कैडर अफ़सर, अवमानना के मामले में सर्वोच्च अदालत में चले गए। 
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