अंतर्राष्ट्रीय टूर कराने वाली नामचीन ट्रेवल कंपनी काक्स एंड किंग्स पर मुरादाबाद उपभोक्ता फोरम ने 4.56 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। ये जुर्माना कंपनी पर अमरनाथ यात्रियों को बुकिंग के बाद यात्रा न कराने पर लगाया गया है।
चंदौसी निवासी मोहित जैन, राहुल अग्रवाल, महिला जैन, लोकेश जैन, शिखा जैन, रोहित जैन, सोनिया जैन, संजीव गुप्ता, रश्मि गुप्ता, शरद गुप्ता, अनुपम गुप्ता, अनुराग गुप्ता, अखिलेश वार्ष्णेय, लता वार्ष्णेय, अनुराग अग्रवाल, मीनू अग्रवाल, महक अग्रवाल, भुवनेश वार्ष्णेय व वीनेश को जुलाई-2016 में बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा की यात्रा करनी थी।
जिसके लिए इन सभी संभावित तीर्थ यात्रियों ने नामचीन ट्रेवल कंपनी काक्स एंड किंग्स के सिविल लाइंस मुरादाबाद स्थिति कार्यालय में संपर्क किया।
कंपनी के स्थानीय प्रबंधक ने अमरनाथ यात्रा के लिए दिल्ली से श्रीनगर तक हवाई मार्ग से, श्रीनगर के हवाई अड्डे से श्रीनगर के ही एक विशेष होटल में यात्रियों को ठहराने, दूसरे दिन बस या कार से यात्रियों को बालटाल के रास्ते हेलीकॉप्टर से अमरनाथ यात्रा कराने की बात कही थी।
23 जुलाई-2016 प्रस्थान तिथि तय थी। प्रति व्यक्ति 25 हजार रुपये मुरादाबाद के कंपनी कार्यालय में जमा कराए गए थे। यात्रा तिथि से कुछ दिन पहले यात्रियों ने कंपनी से प्रस्थान व आगमन का पूर्ण विवरण, होटल का नाम व हेलीकॉप्टर से आने जाने का समय आदि मांगा।
कंपनी द्वारा 27 जुलाई-2016 तक विवरण नहीं दिया। कंपनी ने बताया कि श्रीनगर के हालात ठीक नहीं है। आतंकवादी गतिविधियां होने के कारण कंपनी द्वारा 23 जुलाई-2016 की यात्रा रद्द कर दी है। इसके बाद तीर्थ यात्रियों ने कंपनी से जमा की गई धनराशि मांगी लेकिन कंपनी ने धनराशि लौटाने से से इनकार कर दिया।
इस पर उपभोक्ताओं ने अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम-प्रथम मुरादाबाद में वाद दायर किया। इसमें काक्स एंड किंग्स कंपनी द्वारा उपभोक्ता न्यायालय को अवगत कराया कि यात्रियों द्वारा स्वयं ही यात्रा रद्द की गई थी।
हवाई जहाज, होटल, हेलीकॉप्टर आदि की बुकिंग के बाद धनराशि वापस नहीं की जा सकती। उपभोक्ता न्यायालय ने ट्रेवल्स एजेंसी व अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के तर्कों को सुनने के बाद कंपनी को दोषी माना और आदेश दिया कि ट्रेवल कंपनी को प्रति यात्री 24 हजार रुपये अदा करने होंगे। अन्यथा दो माह के बाद नौ फीसदी ब्याज भी अदा करना होगा।
उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय ने बताया कि कुल 19 यात्रियों ने बुकिंग कराई थी, जिनका यात्रा कंपनी की बहानेबाजी के कारण रद्द हो गई, इसके बाद कंपनी ने छलपूर्वक उनकी धनराशि भी लौटाने से इनकार कर दिया था। बिना यात्रा कराए ही, कंपनी यात्रियों की जमा धनराशि हड़पना चाहती थी, जिसे उपभोक्ता न्यायालय में कंपनी अपने तर्कों को साबित भी नहीं कर सकी। उपभोक्ता न्यायालय ने सही निर्णय दिया है, जो स्वागत योग्य है।