चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि हमारा संविधान हाशिए पर खड़े लोगों के साथ बुद्धिजीवियों की आवाज है। संविधान ने संकट के क्षणों में हमारा मार्गदर्शन किया है। इसमें दर्ज की गई हर सलाह देश हित में है। अगर हम संविधान के मुताबिक नहीं चले तो अराजकता बढ़ेगी। जब संविधान लागू किया गया था उस वक्त व्यापक पैमाने पर इसकी आलोचना हुई थी, लेकिन समय ने आलोचनाओं को कमजोर किया। गर्व की बात है कि कई दशक से इसका जिक्र बेहद जोश के साथ किया जा रहा है।
रवि शंकर प्रसाद (फाइल फोटो)
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को कहा कि न्यायपालिका को यह फैसला करना चाहिए कि वह शासन के मुद्दों पर अपने अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए कहां तक जा सकती है। साथ ही उन्होंने सभी अंगों को अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ का पालन करने पर जोर दिया। प्रसाद ने यह बात संविधान दिवस के कार्यक्रम में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की मौजूदगी में कही। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ जज भी मौजूद थे।
कानून मंत्री ने कहा कि शासन को बहुत अधिक जटिल काम बनाया जा रहा है, ऐसे में आवश्यकता है कि यह पता चले कि आखिर न्यायपालिका कहां तक जा सकती है। यह न्यायपालिका को तय करना है। उन्होंने कहा कि जब एक सरकार संचालित होती है तो बहुत सारे प्रतिस्पर्धी हित होते हैं, बहुत सारे जटिल दावे होते हैं और बहुत से अन्य निहित हित हैं, जिन्हें समझने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि वह पूरे सम्मान के साथ काम करने के जुनून को समझते हैं लेकिन यह जुनून ऐसा नहीं होना चाहिए जो दूसरों के अधिकार क्षेत्र में दखल दे। वह अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के विकास सिंह के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें उन्होंने विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच अलग शक्तियों का मुद्दा उठाया था।