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राष्ट्रपति कोविंद बोले- संविधान निर्माताओं के दूरदर्शिता की बदौलत सभी नागरिक सुरक्षित

Tue, 26 Nov 2019 01:31 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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संयुक्त सत्र को संबोधित करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद - फोटो : ANI
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संविधान दिवस के मौके पर मंगलवार को संसद का संयुक्त सत्र आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू शामिल हुए। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सत्र को संबोधित करते हुए देश और विदेश में रहने वाले भारत के सभी लोगों को, भारत के संविधान की 70वीं वर्षगांठ की हार्दिक बधाई दी। 

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राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि 70 साल पहले इसी दिन भारत ने संविधान को अंगीकृत किया। संविधान दिवस को मनाना संविधान शिल्पि के प्रति श्रद्धांजलि है। सन 2015 में, बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर के 125वें जयंती वर्ष के दौरान, भारत सरकार ने 26 नवंबर के दिन को, प्रति वर्ष, ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। 

उन्होंने कहा कि भारत का संविधान विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का आधार-ग्रंथ है। यह हमारे देश की लोकतांत्रिक संरचना का सर्वोच्च कानून है जो निरंतर हम सबका मार्गदर्शन करता है। यह संविधान हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्गम भी है और आदर्श भी। 
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राष्ट्रपित ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शी और परिश्रम के द्वारा कालजयी प्रति का निर्माण किया, जिसमें हम सभी नागरिक सुरक्षित हैं। यह हमारा मार्गदर्शन करता है। हमने विश्व के कई संविधानों के उत्तम व्यवस्था को निभाया है। 

उन्होंने कहा कि इसी साल देशवासियों ने चुनाव में हिस्सा लिया। मतदान में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर रही। 78 महिलाओं का चुना जाना गौरव की बात है। 70 साल की अवधि में भारतीय संविधान ने जो उपलब्धि हासिल की, उसके लिए सभी नागरिक सराहना के पात्र हैं।

रामनाथ कोविंद ने कहा कि 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में अपना अंतिम भाषण देते हुए डॉक्टर आंबेडकर ने कहा था कि संविधान की सफलता भारत की जनता और राजनीतिक दलों के आचरण पर निर्भर करेगी। डॉ अंबेडकर ने संविधान सभा के अपने एक भाषण में ‘संवैधानिक नैतिकता’ के महत्व को रेखांकित करते हुए इस बात पर जोर दिया था कि संविधान को सर्वोपरि सम्मान देना और वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर, संविधान-सम्मत प्रक्रियाओं का पालन करना, ‘संवैधानिक नैतिकता’ का सार-तत्व है।

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मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता आवश्यक: उपराष्ट्रपति

संविधान दिवस के मौके पर उपराष्ट्रपति ने भी अपने संबोधन में कहा कि आज संविधान में उल्लेखित बातों को अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को मौलिक अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए। 

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विद्यालयों को बच्चों को उनके कर्तव्यों के बारे में अवगत कराना चाहिए। हमारा लक्ष्य 'रिफॉर्म','परफॉर्म' और 'ट्रांसफॉर्म' होना चाहिए। हमें देश की अखंडता और एकता के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति का उत्थान सबसे पहले होना चाहिए। साथ ही हमें अपने मातृभाषा की इज्जत करनी चाहिए और इसका प्रसार करना चाहिए। 

राष्ट्रीय युवा संसद योजना पोर्टल शुरू
राष्ट्रपति ने रामनाथ कोविंद ने राज्यसभा के 250वें सत्र के अवसर पर 250 रुपये मूल्य का सिक्का और स्मृति डाक टिकट जारी किया। जारी किए गए सिक्के के एक तरफ सत्यमेव जयते लिखा है, वहीं दूसरी तरफ संसद भवन का चित्र है। 

साथ ही संसद में भारत के संविधान के इतिहास पर प्रदर्शनी का उद्घाटन और लोकसभा कैलेंडर 2020 का लोकार्पण हुआ। संसद में आयोजित इस प्रदर्शनी में संविधान निर्माण से लेकर इसके लागू होने तक की पूरी कहानी को प्रदर्शित किया गया है। साथ ही 'भारतीय संसदीय प्रक्रिया में राज्यसभा की भूमिका' पुस्तक का विमोचन हुआ। वहीं, राष्ट्रीय युवा संसद योजना पोर्टल का भी शुभारंभ किया गया। 

26 नवंबर को संविधान सभा ने औपचारिक तौर पर अपनाया था संविधान
संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है। भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 में लागू हुआ था। लेकिन संविधान सभा द्वारा इसे 26 नवंबर 1949 को ही औपचारिक तौर पर अपना लिया गया था। 

इसका उद्देश्य संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संविधान निर्माण में लगे प्रयासों को दुनियाभर में प्रसारित करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने अक्टूबर 2015 में 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी। 
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