अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ नेशनल कॉन्फ्रेंस, सज्जाद लोन के नेतृत्व वाला जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और वकील एमएल शर्मा समेत कई लोगों ने याचिकाएं दी हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से लोकसभा सांसद मोहम्मद अकबर लोन और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस हसनैन मसूदी ने दी है। इसके अलावा, कई पूर्व नौकरशाहों और सेना के पूर्व अफसरों ने भी याचिकाएं दी हैं। इनके अलावा, नौकरशाह से नेता बने शाह फैसल और जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला राशिद ने भी याचिकाएं दी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने एमडीएमके नेता और राज्यसभा सांसद वाइको की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें वाइको ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी को चुनौती देते हुए उन्हें शीर्ष अदालत में पेश किए जाने की मांग की थी।
जस्टिस गोगोई की पीठ ने वाइको की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि अब इसमें कुछ बचा नहीं हैं क्योंकि फारूक अब्दुल्ला को जन सुरक्षा कानून के तहत नजरबंद किया गया है। जस्टिस गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एसए नजीर की पीठ ने कहा, उचित अथॉरिटी के समक्ष इसे चुनौती दी जा सकती है।
जस्टिस गोगोई की पीठ ने जम्मू-कश्मीर के सभी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में हाई स्पीड इंटरनेट और लैंडलाइन फोन सेवाओं की फौरन बहाली को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। पीठ ने इस याचिका को भी कश्मीर से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ ही संविधान पीठ के पास भेज दिया। में कोर्ट से इस बारे में सरकार को निर्देश देने की अपील की गई है।