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38 दिनों तक चली मैराथन सुनवाई के बाद 'आधार' पर फैसला सुरक्षित, अनिवार्यता पर रहेगी रोक

Thu, 10 May 2018 10:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आधार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में बहस पूरी हो गई और पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। बहरहाल, जब तक संविधान पीठ का फैसला नहीं आ जाता तब तक बैंक खातों, मोबाइल सिम, बीमा पॉलिसी आदि को आधार से जोड़ने की अनिवार्यता पर रोक जारी रहेगी।  

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'अब तक 1.21 अरब लोग बनवा चुके हैं आधार'

आधार की संवैधानिक वैधता को लेकर 38 दिनों तक चली सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एके सिकरी, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की संविधान पीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। कानून के जानकारों की माने तो केश्वानंद भारती मामले के बाद आधार मामले की सुनवाई सबसे अधिक दिनों तक चली। जुलाई में इस पर संविधान पीठ फैसला सुना सकती है। संविधान पीठ का आदेश इस मायने में महत्वपूर्ण होगा क्योंकि अब तक 1.21 अरब लोग आधार बनवा चुके हैं और आधार के जरिए अब तक 19.16 अरब का लेन-देन हो चुका है। 
 

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कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस के पुट्टास्वामी सहित 27 याचिकाकर्ताओं ने यह कहते हुए आधार की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी कि आधार के लिए अंगुलियों और आंखों की पुतलियों के चिह्न सहित अन्य निजी जानकारियां लेना नागरिकों की निजता के अधिकार के विपरीत है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि आधार नीति निजता के अधिकार को प्रभावित करती है। साथ ही इसमें डाटा के संरक्षण की गारंटी नहीं है। लिहाजा इसके दुरुपयोग की आशंका है और ऐसा हो भी रहा है। 

याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार ने शुरुआत में आधार को स्वैच्छिक करार दिया था लेकिन सरकार द्वारा एक के बाद एक नई योजनाओं और सेवाओं के साथ आधार को लिंक करने को अनिवार्य करने का निर्णय लेना गैरकानूनी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि आधार अधिनियम कमजोर और समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों को दूसरी श्रेणी का नागरिक मानता है। हालत यह है कि आधार के बगैर भारत में रहना असंभव हो गया है। 

हालांकि केंद्र सरकार ने आधार कानून का बचाव करते हुए कहा कि कालेधन, आतंकवाद, मनी लाउंडरिंग से निपटने के लिए आधार एक बड़ा हथियार है। साथ ही सरकार की ओर दी जाने वाली सब्सिडी जरूरतमंदों तक पहुंचेगी। सब्सिडी के दुरुपयोग पर लगाम लगी है। साथ ही सरकार का कहना था कि आधार के लिए नागरिकों से लिए जाने वाले डाटा का किसी तरह दुरुपयोग नहीं होगा। सरकार का यह भी कहना था कि कानून के दुरुपयोग होने की आशंका के कारण किसी कानून को निरस्त नहीं किया जा सकता। 
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