लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। सदन में इस बिल की हार को विपक्ष की बड़ी सफलता बताते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक सीधे तौर पर भारत के संविधान पर एक हमला था, जिसे हमने हरा दिया है। गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए साफ किया कि विपक्ष ने पहले ही कह दिया था कि यह महिलाओं का बिल नहीं है, बल्कि भारत की चुनावी संरचना को बदलने का एक प्रयास है।
राहुल गांधी ने सदन में अपने संबोधन के दौरान कहा कि महिलाएं हमारे राष्ट्रीय दृष्टिकोण में एक प्रमुख प्रेरक शक्ति हैं। हालांकि, उन्होंने मौजूदा बिल को खारिज करते हुए कहा कि यह कोई महिला बिल नहीं है और इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि 2023 का महिला बिल वापस लाया जाता है, तो विपक्ष उसे लागू करने के लिए इसी वक्त पास कराने में मदद करेगा।
विपक्ष के नेता ने सरकार पर पिछड़े वर्गों को राजनीतिक मुख्यधारा से दूर रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य एजेंडा ओबीसी वर्ग को सत्ता और प्रतिनिधित्व देने से बचना है। इसके साथ ही, उन्होंने दावा किया कि सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि अगले 15 वर्षों तक जातीय जनगणना का राजनीतिक प्रतिनिधित्व से कोई संबंध न रहे।
गांधी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपनी ताकत कम होने से डरी हुई है और इसीलिए सरकार भारतीय राजनीतिक मानचित्र को फिर से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है।
सदन में राहुल गांधी ने दक्षिण, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन राज्यों को यह संदेश दे रही है कि बीजेपी को सत्ता में बनाए रखने के लिए उनका प्रतिनिधित्व उनसे छीन लिया जाएगा। सरकार के इस कदम को 'राष्ट्र-विरोधी कृत्य' करार देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि पूरा विपक्ष एकजुट होकर इसे हराएगा। उन्होंने इन राज्यों को पूर्ण आश्वासन दिया कि विपक्ष सरकार को भारत संघ में उनके प्रतिनिधित्व के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने देगा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एकजुट विपक्ष ने परिसीमन के जरिए लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित करने की कोशिश को विफल कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने देश की आधी आबादी को आधार बनाकर एक ऐसा कदम उठाने की कोशिश की, जिससे संविधान, संघीय व्यवस्था और लोकतंत्र पर असर पड़ सकता था।
खरगे के अनुसार, विपक्षी गठबंधन ने समय रहते इस रणनीति को समझ लिया और एकजुट होकर इसका विरोध किया, जिसके चलते संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। उन्होंने इस मुद्दे पर साथ देने वाले सभी विपक्षी दलों के नेताओं का आभार भी जताया और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के रूप में बताया।