पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले गेहूं की अवैध खरीद की गई। सरकारी/एफसीआई चिह्नों वाले बोरों की उलट-पलट कर धोखाधड़ी से उनकी दोबारा से पैकिंग की गई। इसके बाद गेहूं से भरे बोरों का घोजाडांगा एलसीएस के माध्यम से बांग्लादेश को निर्यात किया गया। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने इस सप्ताह कोलकाता, बोंगांव, रानीगंज, मुर्शिदाबाद और हाबरा में स्थित 17 परिसरों में छापेमारी की। ये परिसर निरंजन चंद्र साहा और अन्य से पीडीएस घोटाले के मामले में जुड़े हुए थे। तलाशी के दौरान 30.9 लाख रुपये नकद, विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और धन शोधन से संबंधित डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं।
ईडी ने मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल पुलिस की एफआईआर संख्या 1150/2020 के आधार पर इस केस की जांच शुरु की है। सीमा शुल्क उपायुक्त, घोजाडांगा एलसीएस की शिकायत पर बसीरहाट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में कल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के गेहूं के बड़े पैमाने पर गबन का आरोप लगाया गया था।
आईपीसी की धारा 379/411/120बी और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7(i)(a)(ii) के तहत दंडनीय अपराधों का खुलासा हुआ है। आरोप है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले गेहूं की अवैध खरीद की गई। उसे बांग्लादेश में निर्यात किया गया। सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। आरोपियों को अनुचित लाभ प्राप्त हुआ। पुलिस की जांच के दौरान निरंजन चंद्र साहा, सहाबुद्दीन एसके और साहिदुर रहमान को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आईपीसी, 1860 की धारा 379/411/413/414/120बी और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7(i)(a)(ii) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।
ईडी की जांच में एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ, जिसमें निर्यातकों, थोक विक्रेताओं, आपूर्तिकर्ताओं, परिवहनकर्ताओं, कमीशन एजेंटों और अन्य मध्यस्थों की संलिप्तता थी। यह साजिश कई जिलों में फैली हुई थी। इसके अंतरराज्यीय प्रभाव थे। लगभग 175 ट्रकों में लदे लगभग 5101.25 मीट्रिक टन पीडीएस गेहूं को विभिन्न पार्किंग स्थलों से जब्त किया गया। बड़ी संख्या में इनवॉइस, बिल, ट्रक दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए। इन दस्तावेजों के सत्यापन से पता चला कि इनमें से अधिकांश फर्जी तरीके से तैयार किए गए थे, जिनमें सही वाहन संख्या, थोक विक्रेताओं के लाइसेंस विवरण, जीएसटी संख्या और प्रामाणिक लेनदेन रिकॉर्ड जैसी आवश्यक जानकारियों का अभाव था। इससे स्पष्ट होता है कि वैध व्यापार का झूठा दिखावा करने के लिए जानबूझकर इन्हें जाली तरीके से बनाया गया था।
ईडी की तलाशी के दौरान यह खुलासा हुआ कि आरोपियों ने कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के लिए निर्धारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के गेहूं को अवैध रूप से हस्तांतरित करने के लिए एक सुनियोजित कार्यप्रणाली अपनाई थी। आपूर्तिकर्ताओं, लाइसेंस प्राप्त वितरकों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से अनधिकृत चैनलों के माध्यम से गेहूं कम कीमतों पर खरीदा गया था। आपूर्ति श्रृंखला से बड़ी मात्रा में गेहूं को अवैध रूप से हस्तांतरित किया गया।
कई स्थानों पर उसे एकत्रित किया गया। इसकी उत्पत्ति को छिपाने के लिए, आरोपियों ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य सरकार के चिह्नों वाले मूल बोरे हटा दिए या उलट दिए और उन्हें फिर से भर दिया। इसका मकसद, पहचान संबंधी विशेषताओं को छिपाना था। पीडीएस गेहूं को वैध स्टॉक के रूप में खुले बाजार में बिक्री के लिए रखा गया। इसके परिणामस्वरूप आरोपियों ने अनुचित रूप से धन अर्जित किया। अपराध की आय प्राप्त की।