संसद के बीते मानसून सत्र की तरह वर्तमान शीत सत्र में भी राफेल सौदे पर कांग्रेस और मोदी सरकार के बीच सियासी जंग की जमीन तैयार हो गई है। इस मुद्दे पर मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट की क्लीन चिट के बाद बुधवार को बिना मतदान वाले नियम 1993 के तहत इस पर चर्चा हो सकती है। सोमवार को स्पीकर सुमित्रा महाजन के साथ हुई बैठक में सरकार और कांग्रेस दोनों बुधवार को चर्चा कराने पर सैद्घांतिक तौर पर तैयार थी। हालांकि अंतिम फैसला बुधवार को कार्यवाही शुरू होने के बाद होगी।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी इस सौदे की जेपीसी जांच पर अड़ी कांग्रेस ने सोमवार को लोकसभा में बुधवार को चर्चा के लिए तैयार रहने की बात कही थी। कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकर्जुन खडग़े ने कहा था कि पार्टी सरकार की चर्चा की चुनौती स्वीकार करती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पहले भी मानसून सत्र में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान सरकार और कांग्रेस ने एक दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में तथ्यात्मक त्रुटियां हैं। इसके अलावा उसकेमुख्य मुद्दे राफेल विमान की कीमत पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सरकार का हवाला देते हुए कहा है कि राफेल सौदे के बारे में पहले कैग से सूचना साझा की गई, फिर यह मामला संसद की लोकलेखा समिति के भी संज्ञान में लाया गया। ऐसे में पार्टी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर ही केंद्र सरकार पर निशाना साधेगी।
जबकि इस मुद्दे पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ढाल बनाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधने का मन बनाया है। चर्चा में सरकार की ओर से कहा जाएगा कि मनमाफिक फैसला न आने केकारण कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट को भी निशाना बनाने से नहीं चूक रही। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस ने पीएम मोदी और रक्षा मंत्री पर तो भाजपा ने राहुल पर गलतबयानी करने का आरोप लगाते हुए लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है।