मध्यप्रदेश की 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। इनका परिणाम राज्य की सत्ता के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। इसके बाद बिहार विधानसभा का रण होगा और उसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में निर्णय की घड़ी आएगी।
2021 में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव होंगे। यही वजह है कि कांग्रेस अपनी आंतरिक और बाहरी किलेबंदी और मोर्चों को मजबूत करने में जुट गई है। असम और पश्चिम बंगाल के चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद अहम हैं।
बंगाल में ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने के लिए पार्टी ने वहां एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है। वहीं कांग्रेस की निगाह असम, केरल और पुडुचेरी पर है। तमिलनाडु में डीएमके का साथ मिलने के बाद कांग्रेस वहां भी सत्ता में पहुंचने का रोडमैप तैयार कर रही है।
कांग्रेस पार्टी के पास रणनीतिकारों की कमी नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम, शशि थरूर, केसी वेणुगोपाल समेत सभी की चिंता चुनावों का दौर शुरू होने से पहले पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में जान डालने की है।
एक पूर्व कंद्रीय मंत्री कहते हैं कि हमें राहुल गांधी को बचाकर रखना होगा। पिछले कुछ वर्षों से भाजपा और आरएसएस वाले राहुल गांधी की छवि को खराब कर रहे हैं। यह सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है जबकि राहुल गांधी विपक्ष के दमदार नेता की तरह महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। इसलिए कांग्रेस को आगे की चुनौतियों को देखकर दिशा तय करनी होगी। पार्टी के कुछ और नेताओं को जिम्मेदारी के साथ आगे आना होगा।