लगातार दो लोकसभा चुनाव हारने और राज्यों में क्षेत्रीय दलों के आगे प्रभावहीन हो रही कांग्रेस नए सिरे से खुद को मजबूती देने जा रही है। 28 दिसंबर को पार्टी के 137वें जन्मदिन पर नेता और कार्यकर्ता धरना-प्रदर्शन और आंदोलन की रणनीति पर आगे बढ़ने का संकल्प लेंगे।
पूरे देश में महंगाई बढ़ी अभियान और रैली के बाद अब दूसरे चरण में बेरोजगारी और सरकारी कंपनियों के निजीकरण के मुद्दे पर पार्टी हल्ला बोलेगी। दिग्विजय सिंह की अगुवाई वाली पार्टी की आंदोलन और धरना प्रदर्शन समिति ने बैठक कर रणनीति तैयार की है। प्रियंका गांधी समेत नौ सदस्य समिति में हैं।
समिति के सदस्यों के मुताबिक पार्टी देशभर में जनता तक पहुंचाने के लिए एक ट्रेनिंग अभियान पहले ही शुरू कर चुकी है। जिला और ब्लॉक स्तर तक करीब 5500 ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं जो नुक्कड़ प्रवक्ता की भूमिका में चाय की दुकानों और अन्य पब्लिक जगहों पर समाज में होने वाली बहस में पार्टी का पक्ष रखने वाले तैयार कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल किया जा रहा है। पार्टी इस ट्रेनिंग कार्यक्रम को 2024 तक लगातार चालू रखेगी। जनजागरण अभियान के साथ ही जनता और मीडिया का ध्यान खींचने के लिए बैलगाड़ी पर निकलना, ट्रैक्टर यात्रा जैसे कार्यक्रम भी शामिल किए जा रहे हैं। साथ ही राम पुन्नानी, आदित्य मुखर्जी जैसे इतिहासकारों को भी जोड़ने की तैयारी है।