कांग्रेस मुख्य सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए अपनाई गई प्रक्रिया को कोर्ट में चुनौती देगी। प्रवक्ता मनीष तिवारी का कहना कि नियुक्ति में नियम कानून और प्रक्रिया को दरकिनार किया गया जो असंवैधानिक है।
लिहाजा अदालत में इस गंभीर और संवेदनशील मामले को चुनौती का विकल्प खुला है। कांग्रेस ने नियुक्ति प्रक्रिया खारिज कर,नई सर्च कमेटी बना नए आवेदन मंगाकर नई नियुक्ति की मांग की है। दोनों पदों पर नियुक्ति की अधिसूचना अभी जारी होनी है।
मनीष तिवारी ने मीडिया में आरोप लगाया कि बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेब से एक नाम निकाला और नियुक्ति कर दी गई। आखिर सरकार संवैधानिक पद पर और भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने वाली संस्था में अपनी पसंद का व्यक्ति क्यों बैठाना चाहती है। सरकार क्या छुपाना चाहती है जो नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाई गई।
तिवारी ने कहा देश में चतुर्थ क्लास के कर्मचारी की सीधी नियुक्ति नहीं हो सकती है ऐसे में प्रधानमंत्री ने बैठक में तुगलकी फरमान सुनाते हुए राष्ट्रपति के सचिव संजय कोठारी को नया मुख्य सतर्कता आयुक्त नियुक्त कर दिया। जबकि उन्होंने इस पद के लिए आवेदन तक नहीं किया था। जिस व्यक्ति को भ्रष्टाचार रोकने की जिम्मेदारी दी गई है उसकी नियुक्ति प्रक्रिया गैरकानूनी और असंवैधानिक है।
तिवारी ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और सर्च कमेटी के सामने लोकसभा में विपक्ष की बड़ी पार्टी के नाते कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी शामिल हुए थे। उन्होंने बैठक में अपने संविधान और नियम-कानूनों का हवाला दिया तो प्रधानमंत्री ने भी उनकी बातों पर सहमति जताई लेकिन उनकी ओर से कोठारी का नाम रखा गया। न तो उन्होंने आवेदन किया और न ही सर्च कमेटी की ओर से उनके नाम पर संज्ञान लिया गया था।
इसी प्रकार सतर्कता आयुक्त के पद के लिए जो आवेदन आए थे उसमें वित्त सचिव राजीव कुमार भी शामिल हैं। जबकि वे सर्च कमेटी में भी बतौर सदस्य शामिल है। ऐसा कैसे हो सकता है कि जिस व्यक्ति ने खुद आवेदन किया हो वो अपना या दूसरे अन्य आवेदकों पर कोई फैसला ले सकता है। तिवारी ने बताया कि दोनों पदों के लिए करीब 180 लोगों ने आवेदन किया था।