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Congress: मणिपुर जाकर क्या करने की कोशिश कर रहे राहुल गांधी, कांग्रेस को इससे कितना फायदा?

Fri, 30 Jun 2023 03:19 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी दो दिन के मणिपुर दौरे पर हैं। शुक्रवार को उन्होंने मोइरांग रिलीफ कैंप में हिंसा प्रभावित लोगों से मुलाकात की। इस साल मिजोरम और फिर अगले साल अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राहुल गांधी का मणिपुर दौरा पूर्वोत्तर में कांग्रेस की खोई हुई सियासी जमीन पाने का एक कदम हो सकता है। 
 
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राहुल गांधी का मणिपुर दौरा - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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राहुल गांधी दो दिन के मणिपुर दौरे पर हैं। शुक्रवार को उन्होंने मोइरांग रिलीफ कैंप में हिंसा प्रभावित लोगों से मुलाकात की। इसके पहले गुरुवार को राहुल ने चूराचांदपुर में रिलीफ कैंप में पीड़ितों से मुलाकात की थी। हालांकि, चूराचांदपुर पहुंचने से पहले राहुल का काफिला बिष्णुपुर में रोका गया था। 
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पुलिस ने कहा था कि हिंसा की आशंका के चलते काफिला रोका गया। इसके बाद राहुल हेलिकॉप्टर से चूराचांदपुर पहुंचे थे। यहां उन्होंने कहा था- मैं मणिपुर के अपने सभी भाई-बहनों को सुनने आया हूं। सभी समुदायों के लोग बहुत स्वागत और प्रेम कर रहे हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार मुझे रोक रही है।

राहुल के मणिपुर दौरे से सियासी हलचल तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि आखिर वह हिंसाग्रस्त मणिपुर जाकर क्या करने की कोशिश कर रहे हैं? कांग्रेस को इसका कितना फायदा होगा? आइए समझते हैं...
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राहुल गांधी। - फोटो : अमर उजाला
मणिपुर जाकर क्या करने की कोशिश कर रहे हैं राहुल?
पूर्वोत्तर राज्यों के जानकार कहते हैं कि पिछले नौ साल के अंदर भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्यों से कांग्रेस को पूरी तरह से साफ कर दिया है। 2014 में जब नरेंद्र मोदी पीएम बने थे, तब पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। अब लगभग सभी जगह भाजपा और भाजपा गठबंधन की सरकार है। इस साल नवंबर तक पूर्वोत्तर के अहम राज्य मिजोरम और फिर अगले साल अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव होने हैं। सिक्किम और अरुणाचल में भाजपा गठबंधन की सरकार है, जबकि मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट की सत्ता है। ऐसे में कांग्रेस पूर्वोत्तर में फिर से अपना कब्जा चाहती है। यही कारण है कि राहुल गांधी ने मणिपुर के रास्ते पूर्वोत्तर में अपनी पहुंच बढ़ानी शुरू कर दी है। 

राहुल गांधी। - फोटो : ANI
कांग्रेस को इसका कितना फायदा होगा?
दक्षिण की तरह पूर्वोत्तर के राज्य भी ऐसे हैं, जहां लंबे समय तक कांग्रेस की पकड़ रही है। ऐसे में अभी भी यहां कांग्रेस को बड़ा फायदा हो सकता है। राहुल की भारत जोड़ो यात्रा का कुछ असर कर्नाटक चुनाव में देखने को मिल चुका है। संभव है कि वह मणिपुर हिंसा के जरिए पूर्वोत्तर के राज्यों में कांग्रेस की पकड़ को मजबूत करने में कामयाब हो सकें। 

इसके जरिए वह जनता के बीच जाकर ये बताने की कोशिश करेंगे कि भाजपा की सरकार पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा रोकने में नाकामयाब रही है और इसके चलते लाखों लोगों को परेशान होना पड़ा है। राहुल लगातार ये बातें सार्वजनिक मंच से भी बोलते आ रहे हैं। 

राहुल के साथ-साथ सोनिया गांधी भी मणिपुर का मामला उठा चुकी हैं। इस तरह से अब पूरी कांग्रेस बार-बार मणिपुर हिंसा का मुद्दा उठाती रहेगी। इससे एक तरफ राष्ट्रीय स्तर पर ये मुद्दा हावी रहेगा तो दूसरी ओर पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को कांग्रेस ये भी एहसास दिलाती रहेगी कि वह उनके मुद्दों को उठा रहे हैं। 

 
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सोनिया गांधी - फोटो : ट्विटर/कांग्रेस
सोनिया ने वीडियो संदेश जारी किया था 
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पिछले दिनों मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर एक वीडियो संदेश जारी किया था। इसमें सोनिया ने कहा था, इस हिंसा ने आपके राज्य (मणिपुर) में लोगों के जीवन को तबाह कर दिया और हजारों लोगों को उजाड़ दिया है। इस हिंसा ने हमारे राष्ट्र की अंतरात्मा में एक गहरा घाव छोड़ा है।

सोनिया ने कहा कि मुझे यह देखकर गहरा दुख हुआ है कि लोगों को उस एकमात्र स्थान से पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा जिसे वे अपना घर कहते हैं। उन्होंने लोगों से शांति और सद्भाव की अपील करते हुए कहा कि आज हम जो रास्ता अपने बच्चों को सिखाएंगे, यही उनके भविष्य को संजोएगा। साथ ही यही उनको विरासत में मिलेगा। मणिपुर के लोगों से अपार आशा और विश्वास है और मैं जानती हूं कि हम सब मिलकर इस परीक्षा से पार पा लेंगे।
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