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गठबंधन, कहीं महागठबंधन और कहीं टेढ़ी है कांग्रेस के तालमेल की राह

Fri, 18 Jan 2019 09:41 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का अरमान अधूरा रह गया। वह समाजवादी पार्टी, बसपा, रालोद के साथ महागठबंधन चाहते थे। बात भी रास्ते पर थी, लेकिन आखिरी मोड़ पर गच्चा खा गए। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस खुद गठबंधन का रोड-मैप तय नहीं कर पा रही है। बिहार को छोड़कर अब उसके बाद महागठबंधन को लेकर कोई उम्मीद नहीं है। तमिलनाडु में राजनीतिक घटनाक्रम पर कांग्रेस की निगाह टिकी है। महाराष्ट्र में उसके पास एनसीपी के साथ साथ शिवसेना की तरफ़ से भी महागठबंधन का संदेश आ रहा है, लेकिन कांग्रेस खुद उसके साथ करना नहीं चाहती। फिलवक्त कांग्रेस का चुनाव तैयारी और रणनीति में व्यस्त रहने वाला वॉर रूम इसी तरह की संभावनाओं की रूपरेखा तैयार कर रहा है।
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उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड =  139 सीट

कांग्रेस को 80 सीटे वाले उत्तर प्रदेश में बहुत उम्मीद थी। बसपा के साथ चुनावी तालमेल की तीव्र है। इच्छा भी, लेकिन मायावती की नाराजगी के कारण पानी फिर गया। अब कांग्रेस के पास यहां अकेले चुनाव लडऩे का विकल्प बचा है। हालांकि पार्टी के रणनीतिकार कुछ छोटे दलों के साथ तालमेल करके 2019 के चुनाव को धारदार बनाने की कोशिश में लगे हैं। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल, रालोसपा, जीतनराम मांझी की हम कांग्रेस के साथ महागठबंधन को अंतिम रूप देने के पक्ष में है। वामदल भी साथ देंगे। 40 सीटों वाले बिहार में मामला सीटों पर अटका है। जल्द ही फाइनल हो जाने की उम्मीद है। उत्तराखंड की 05 लोकसभा सीट पर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। 

हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर =  सीट 34

हरियाणा की 10, पंजाब की 13, हिमाचल की 01, 01 की एक सीट पर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस हाई कमान से आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव न लड़ने का आग्रह किया है। जम्मू-कश्मीर में पीडीपी की छवि को तगड़ा झटका लगा है। नेशनल कांफ्रेस पीडीपी के साथ मिलकर चुनाव लडऩे के पक्ष में नाक भौं सिकोड़ रही है। ऐसे में उम्मीद है कि कांग्रेस और एनसीपी के बीच में छह सीटों में बंटवारा हो। 
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राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ = 98 सीट

दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने अकेले चुनाव लडऩे की घोषणा की है। आम आदमी पार्टी के साथ तालमेल की गुंजाइश कम है। इस तरह से राजस्थान की 25, मध्यप्रदेश29, दिल्ली, 07, छत्तीसगढ़ 11और गुजरात की 26 सीट पर भी कांग्रेस पार्टी अकेले ही चुनाव का सामना कर सकती है। हालांकि गुजरात में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(एनसीपी) के साथ तालमेल की संभावना है। 

अंदरखाने से एक खबर और है। बताते हैं सपा, बसपा दोनों इन राज्यों में कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लडऩा चाहते हैं। यदि कोई नया फार्मूला बन पड़ा तो कई और राज्यों में तालमेल का गणित बदल सकता सकता है। माना जा रहा है कि यह तस्वीर फरवरी के दूसरे सप्ताह तक साफ होने के आसार हैं। फिलहाल अभी कांग्रेस के पास एकला चलो का रास्ता है।
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महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, उड़ीसा = 117 सीट

48 लोकसभा सीट वाले महाराष्ट में कांग्रेस और एनसीपी के बीच में तालमेल पर सहमति बन गई है। शिवसेना को विकल्प की तलाश है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शिवसेना से गठबंधन नहीं चाहते। महाराष्ट्र नव निर्माण सेना भी विकल्प देख रही है और इस पर अभी कांग्रेस, एनसीपी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हां, दोनों दलों ने सहयोगियों के लिए कुछ सीटें छोड़ रखी हैं। इसको लेकर दोनों दल आपस में चर्चा कर रहे हैं। गोवा की 02 सीट पर कांग्रेस अकेले चुनाव में उतरेगी। 

कर्नाटक की 26 लोकसभा सीट के लिए पार्टी के रणनीतिकार एक फार्मूला तैयार कर रहे हैं। इसमें जद(एस) के तालमेल की प्रबल संभावना है। बसपा भी इस गठजोड़ में शामिल हो सकती है। केरल की 20 सीट पर वाम दल और यूडीएफ की स्थिति अभी साफ नहीं हो पा रही है। माना जा रहा है कि यहां भी कांग्रेस अकेले चुनाव में उतर सकती है। उड़ीसा की 21 सीटों पर जनता दल ने अकेले चुनाव लडऩे का फैसला किया है। पिछले चुनाव में उसे 21 में 20 और भाजपा को एक सीट मिली थी। उड़ीसा में भी कांग्रेस अकेले दम पर चुनाव में उतरेगी। 

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना = 42 सीट

तेलंगाना विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने महागठबंधन बनाया था, लेकिन खास सफलता नहीं मिल पाई। लोकसभा चुनाव के साथ आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू लगातार कांग्रेस और वाम दलों के साथ मिलकर गठबंधन का स्वरुप तैयार करने में लगे हैं। चंद्र बाबू की टीडीपी के लिए वाईएसआर कांग्रेस के जगनमोहन रेड्डी चुनौती बने हैं। भाजपा दोनों राज्यों में लोकसभा के उम्मीदवार उतारेगी। ऐसे में कांग्रेस टीडीपी और वामदल के साथ मिलकर चुनौती दे सकती है।

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, त्रिपुरा, असम, उत्तर पूर्व और अन्य राज्य =111 सीट

पश्चिम बंगाल की 42 सीट पर कांग्रेस के सामने धर्म संकट है। पश्चिम बंगाल के नेताओं का कहना है कि लंबे समय का लाभ वामदल के साथ जाने में है। 2019 का तात्कालिक लाभ ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ रहने में है। तृणमूल और वामदल के साथ महागठबंधन संभव नहीं है। क्योंकि तृणमूल और वामदल एक दूसरे के धुर विरोधी हैं। राज्य में दबदबा तृणमूल का है। तृणमूल को भाजपा चुनौती दे रही है। त्रिपुरा की दो सीट पर कांग्रेस अपने पुराने ढर्रे पर चलेगी। तमिलनाडु की 39 सीट पर किसी गठबंधन का आधार डीएमके तय करेगा। 

कांग्रेस के नेता डीएमके के संपर्क में हैं और डीएमके के एमके स्टालिन ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मान लिया है। असम की 14 सीट को लेकर कांग्रेस, अगप, एआईयूडीएफ, बीपीएफ के बीच संभावित तालमेल की संभावना खत्म नहीं हुई है। अरुणाचल, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर की दो-दो, नागालैंड की एक सीट पर कांग्रेस परंपरागत तरीके से आगे बढ़ेगी। यही स्थिति अंडमान निकोबार, दादरा नागर हवेली, लक्ष्यद्वीप, दमन दीव, पुड्डुचेरी की 01-01 सीट पर रहने के आसार हैं। 
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